बीएमसी में सीटिंग अरेंजमेंट पर घमासान, अमेय घोले बैठक छोड़कर निकले; बीजेपी ने बदला फैसला
बीएमसी में सीटिंग अरेंजमेंट को लेकर अमेय घोले के बैठक छोड़ने से विवाद बढ़ा। बीजेपी ने मांग स्वीकार कर स्थायी समिति सभागार में बैठक का फैसला लिया।
बीएमसी गटनेताओं की बैठक में बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद के बाद शिवसेना गटनेता अमेय घोले के कड़े रुख को देखते हुए बीजेपी ने स्थायी समिति सभागार में बैठक की मांग स्वीकार की।
मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका में सत्ताधारी पक्ष के नेताओं के बीच बैठक में सीटिंग अरेंजमेंट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक खींचतान का रूप लेता दिख रहा है। गटनेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान शिवसेना के गटनेता अमेय घोले पीछे की पंक्ति में बैठने की व्यवस्था से नाराज होकर बैठक बीच में ही छोड़कर बाहर निकल गए। उनके इस कदम के बाद बीएमसी के सत्ताधारी गलियारों में हलचल तेज हो गई।
अमेय घोले का ऐतराज बैठक में गटनेताओं के लिए पीछे की पंक्ति में बैठने की व्यवस्था को लेकर था। उनका स्पष्ट कहना था कि यह किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत मान-अपमान का विषय नहीं है, बल्कि गटनेता के पद की गरिमा और बैठक के स्तर के अनुरूप सम्मानजनक सीटिंग अरेंजमेंट होना चाहिए।
अमेय घोले ने मांग रखी कि गटनेताओं की सभी बैठकें स्थायी समिति सभागार में आयोजित की जाएं। उनका कहना था कि स्थायी समिति सभागार में सभी दलों के नेताओं के लिए उनके पद के अनुसार उचित और सम्मानजनक सीटिंग अरेंजमेंट उपलब्ध है।
गौरतलब है कि इससे पहले उपमहापौर संजय घाड़ी भी बीएमसी के कार्यक्रमों और बैठकों में बैठने की जगह को लेकर अपनी नाराजगी सार्वजनिक तौर पर जाहिर कर चुके हैं। अब शिवसेना गटनेता अमेय घोले द्वारा इसी मुद्दे को मजबूती से उठाए जाने के बाद बीएमसी के सत्ताधारी गलियारों में खींचतान और राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अमेय घोले की तीखी नाराजगी के बाद मामले को तूल पकड़ता देख बीजेपी बैकफुट पर आ गई। प्रशासनिक समन्वय बिगड़ने से बचाने और राजनीतिक नुकसान से बचने के लिए बीजेपी ने तत्काल डैमेज कंट्रोल का कदम उठाया। सत्ताधारी नेतृत्व ने निर्णय लिया कि अमेय घोले की मांगों को स्वीकार किया जाएगा और आगे से गटनेताओं की सभी आधिकारिक बैठकें केवल स्थायी समिति सभागार में ही आयोजित की जाएंगी।
बीजेपी के इस त्वरित फैसले के बाद फिलहाल विवाद शांत होता दिख रहा है, लेकिन बीएमसी में बैठने की व्यवस्था को लेकर सामने आई यह अंदरूनी कलह सत्ताधारी पक्ष के बीच समन्वय और राजनीतिक समीकरणों को लेकर शहर के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।