मुंबई में सड़क खुदाई पर बीएमसी सख्त, रोड पॉलिसी 2026 में 10 साल गारंटी
सीमेंट सड़कों के लिए 10 साल का गारंटी पीरियड तय, केबल लाइनों के लिए यूटिलिटी डक्ट और 30 दिन में डिजिटल मैप देना अनिवार्य होगा।
तस्वीर में मुंबई स्थित बीएमसी मुख्यालय की ऐतिहासिक इमारत और सड़क पर गुजरते वाहन दिख रहे हैं।
मुंबई। मुंबई में नई बनी सीमेंट कंक्रीट और डामर की सड़कों को बार-बार खोदने पर रोक लगाने के लिए बीएमसी ने रोड पॉलिसी-2026 तैयार की है। बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर ने स्थायी समिति में इस नए नीतिगत फैसले की जानकारी दी। नई नीति के तहत सड़कों की खुदाई से लेकर मरम्मत, रखरखाव और यूटिलिटी लाइन बिछाने तक के नियम सख्त किए गए हैं।
नए नियम के अनुसार सीमेंट कंक्रीट की सड़कों पर केबल या पाइपलाइन बिछाने के लिए गड्ढा या खड्डा खोदते समय डायमंड कटर का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य खुदाई के दौरान आसपास की सड़क को होने वाले नुकसान को रोकना है। साथ ही सड़कों की मरम्मत और रखरखाव करने वाले ठेकेदारों का गारंटी पीरियड भी बढ़ाया गया है। अब सीमेंट कंक्रीट की सड़कों के लिए गारंटी 10 साल और डामर की सड़कों के लिए 5 साल होगी।
मुंबई में बिजली, टेलीफोन और इंटरनेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को अक्सर सड़क या फुटपाथ खोदना पड़ता है। नई नीति के तहत कम क्षमता वाली बिजली और टेलीकॉम लाइनों को केवल ‘यूटिलिटी डक्ट’ यानी सड़क के नीचे बने विशेष पाइपों के जरिए ही ले जाने की अनुमति होगी। यदि सड़क के नीचे डक्ट नहीं बना है तो संबंधित कंपनी को खुद डक्ट बनाना होगा।
आपातकालीन स्थिति में 5 मीटर से बड़े गड्ढे खोदने पर कंपनियों को दोगुना चार्ज देना होगा। वहीं, बीएमसी ने काम पूरा होने के बाद 30 दिनों के भीतर पाइपलाइन या केबल का डिजिटल मैप जमा करना कंपनियों के लिए अनिवार्य कर दिया है। डिजिटल मैप जमा नहीं करने वाली कंपनी को आगे सड़क खोदने की अनुमति नहीं मिलेगी।
सड़क खुदाई के लिए कंपनियों को अब 15 अगस्त से 15 सितंबर और 15 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच ही ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इस व्यवस्था के जरिए बीएमसी ने सड़क खुदाई से जुड़े कामों को निर्धारित अवधि और प्रक्रिया के तहत संचालित करने का प्रावधान किया है।
बीएमसी की रोड पॉलिसी-2026 लागू होने के बाद बार-बार खोदी जाने वाली सड़कों पर रोक लगाने, सड़क की मजबूती बनाए रखने और खुदाई के कारण होने वाले ट्रैफिक जाम को कम करने की दिशा में व्यवस्था सख्त होगी। इससे सड़क और यूटिलिटी से जुड़े कार्यों के लिए कंपनियों की जिम्मेदारी भी तय होगी।