दक्षिण मुंबई तेरापंथ समाज ने लाडनूं में आचार्य महाश्रमण के दर्शन किए
संघ से जुड़ाव और धार्मिक गतिविधियों में भावी पीढ़ी को शामिल करने की प्रेरणा के साथ गुरुदर्शनम यात्रा संपन्न हुई।
लाडनूं में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सभागार में उपस्थित दक्षिण मुंबई तेरापंथ समाज के श्रद्धालु।
महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल, कालबादेवी में विराजित शासन श्री साध्वी श्री कंचन प्रभाजी, शासन श्री साध्वी श्री मंजुरेखा जी आदि साध्वी वृंद की प्रेरणा से दक्षिण मुंबई तेरापंथ समाज संघ ने लाडनूं में विराजित तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें पट्टधर आचार्य श्री महाश्रमण जी के दर्शनार्थ गुरुदर्शनम यात्रा की। यात्रा के दौरान समाज के सदस्यों ने सर्वप्रथम गुरुदेव की सेवा-दर्शन का लाभ लिया।
इस अवसर पर आचार्य श्री महाश्रमण जी ने फरमाया कि कालबादेवी में प्रायः-प्रायः चातुर्मास होते ही हैं। धर्म आराधना खूब करते रहो। युवाचार्य श्री महावीर कुमार जी ने कहा कि युवक-युवतियों को संघ से जुड़ाव रखना चाहिए। यह हमारी भावी पीढ़ी है।
साध्वी प्रमुखा श्री जी ने तत्त्वज्ञान, तत्त्वप्रचेता, सेवासाधक आदि उपक्रमों के माध्यम से सभी महिलाओं को प्रेरित करते हुए ज्यादा से ज्यादा जोड़कर रखने का संदेश दिया। साध्वी वर्या संबुद्ध यशा जी ने कहा कि ज्ञानशाला में ज्यादा से ज्यादा बच्चों को जोड़ो और खूब धर्म ध्यान करते रहो।
इसके बाद यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने सभी चारित्रात्माओं के सेवा-दर्शन किए। सभी स्थानों पर संस्था शिरोमणि महासभा के पूर्व अध्यक्ष श्री किशनलाल डागलिया ने सामूहिक खमत-खामना करवाए।
फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री कुंदनमल धाकड़, सभा अध्यक्ष श्री देवेंद्र डागलिया और महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती लतिका डागलिया ने दक्षिण मुंबई में चल रही गतिविधियों की जानकारी से अवगत करवाया।
यात्रा संयोजक श्री नितेश धाकड़ ने बताया कि इस यात्रा को सफल बनाने में फाउंडेशन के महामंत्री लक्ष्मीलाल डागलिया, सभा के मंत्री पवन बोलिया, यात्रा के सह संयोजक दीपेश बोराना, भाग्यश्री मेहता, विनोद बरलोटा, निकेश वागरेचा, दीपक सुराणा, रमेश मेहता, सुरेश मेहता, उत्सव धाकड़, सुमन नाहर आदि का अथक श्रम रहा।
यात्रा में आचार्य महाप्रज्ञ विद्या निधि फाउंडेशन, श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, तेरापंथ युवक परिषद और तेरापंथ महिला मंडल दक्षिण मुंबई सक्रिय रहे। गुरुदर्शनम यात्रा के माध्यम से दक्षिण मुंबई तेरापंथ समाज को आचार्य श्री महाश्रमण जी सहित चारित्रात्माओं के दर्शन के साथ धर्म आराधना, संघ से जुड़ाव और भावी पीढ़ी को धार्मिक गतिविधियों से जोड़ने का संदेश मिला।