चेम्बूर तेरापंथ भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बच्चों और साध्वियों की तस्वीर।

मुंबई। चेम्बूर तेरापंथ भवन में आचार्य श्री कालुगणी का पट्टोत्सव विशेष रूप से मनाया गया। आचार्य महाश्रमण की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्री के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में 78 दिनों में संपन्न होने वाले ‘श्रेणी तप’ को तपोउपहार के रूप में प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित श्रावकों को संबोधित करते हुए साध्वीश्री निर्वाणश्री ने कहा कि आज का दिन तेरापंथ धर्मसंघ के लिए विशेष है। आज हमारे सामने तपस्वी बहन पुष्पा चंडालिया श्रेणी तप की भेंट लेकर आई हैं। इतनी लंबी तपस्या अनुमोदनीय है। इस बार चेम्बूर के पूरे चोखले ने तप में अच्छा उत्साह दिखाया है। संवत्सरी महापर्व पर करीब 70 से अधिक बच्चों द्वारा उपवास-पौषध आदि की आराधना सचमुच एक कीर्तिमान है। उन्होंने उन बच्चों और उनके अभिभावकों को शत-शत साधुवाद दिया, जिन्होंने उन्हें प्रेरित और प्रोत्साहित किया।

साध्वीश्री योगक्षेमप्रभाजी ने दोनों प्रसंगों के संदर्भ में अपने सारगर्भित वक्तव्य में कहा कि आज का दिन पवित्रता के पर्याय श्रीमद् कालुगणी को समर्पित है। आज के दिन अष्टम अनुशास्ता आचार्य श्री कालू ने तेरापंथ धर्मसंघ का पदभार संभाला था। उन्होंने कहा कि बहन पुष्पा चंडालिया ने श्रेणी तप करके अतुल आत्मबल का परिचय दिया है। भगवती संवत्सरी पर्व पर चेम्बूर में तप, प्रवचन व पौषध का कीर्तिमान बना है।

तपस्वी पुष्पा चंडालिया ने साध्वी के प्रति अत्यंत कृतज्ञ भाव से कृतज्ञता ज्ञापित की। परिवार की बहनों ने गीत की अभिव्यक्ति दी। जितेन्द्र चंडालिया ने भी प्रासंगिक अभिव्यक्ति दी। साध्वीवृंद ने समूह गीत की प्रस्तुति दी। सभाध्यक्ष लक्ष्मण कोठारी ने अपने भाव प्रकट किए।

तपोभिनंदन के अवसर पर आठ भाई-बहनों ने अट्ठम तप का संकल्प लेकर पुष्पा का अनुमोदन किया। कार्यक्रम का मंच संचालन सभा के पूर्व अध्यक्ष रमेश धोका ने कुशलता से किया। इस तरह चेम्बूर तेरापंथ भवन में आचार्य कालुगणी के पट्टोत्सव के साथ 78 दिवसीय श्रेणी तप और संवत्सरी महापर्व पर हुई तप-आराधना का विशेष अभिनंदन किया गया।

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