दक्षिण मुंबई में जर्जर इमारतों के पुनर्विकास के लिए म्हाडा का बायोमेट्रिक सर्वेक्षण टेंडर रद्द।

मुंबई में दक्षिण मुंबई की करीब 13 हजार उपकरप्राप्त इमारतों के निवासियों की पात्रता तय करने के लिए प्रस्तावित बायोमेट्रिक सर्वेक्षण एक बार फिर अटक गया है। महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) के मुंबई इमारत मरम्मत एवं पुनर्रचना मंडल ने सर्वेक्षण के लिए कंपनी नियुक्त करने की निविदा प्रक्रिया रद्द कर दी है। इस प्रक्रिया में केवल एक ही निविदा प्राप्त होने के कारण मंडल ने यह निर्णय लिया। अब निविदा की शर्तों में आवश्यक बदलाव कर अगले 15 दिनों में नए सिरे से टेंडर जारी किया जाएगा।

दक्षिण मुंबई में करीब 13 हजार उपकरप्राप्त इमारतें आज भी पुनर्विकास की प्रतीक्षा कर रही हैं। इन इमारतों का पुनर्विकास लंबे समय से अटका हुआ है। इस प्रक्रिया को गति देने के लिए राज्य सरकार के निर्देश पर म्हाडा ने अलग पुनर्विकास नीति तैयार की, उसे मंजूरी दिलाई और उसका क्रियान्वयन शुरू किया। हालांकि, नई पुनर्विकास नीति के प्रावधान 79 (अ) और (ब) पर आपत्ति जताते हुए इमारतों के मालिकों ने न्यायालय का रुख किया। फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

इसी बीच, निवासियों की पात्रता का सही निर्धारण करने की आवश्यकता को देखते हुए मुंबई इमारत मरम्मत एवं पुनर्रचना मंडल ने कुछ महीने पहले, वर्ष 2025 में उपकरप्राप्त इमारतों के निवासियों का बायोमेट्रिक सर्वेक्षण शुरू किया था। लेकिन निवासियों और इमारत मालिकों ने इसका विरोध किया। उन्होंने सवाल उठाया कि किस कानून के आधार पर बायोमेट्रिक सर्वेक्षण किया जा रहा है। विरोध के बाद सर्वेक्षण का काम बंद कर दिया गया था।

निवासियों की पात्रता निर्धारित करना आवश्यक मानते हुए मंडल ने दोबारा बायोमेट्रिक सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया। इसके लिए सर्वेक्षण का काम किसी कंपनी को सौंपने के उद्देश्य से निविदा प्रक्रिया शुरू की गई। करीब 15 दिन पहले निविदाएं खोली गईं, लेकिन इस प्रक्रिया को पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं मिली और केवल एक ही निविदा प्राप्त हुई। इसके बाद पूरी निविदा प्रक्रिया रद्द कर दी गई। अब शर्तों में बदलाव के बाद 15 दिनों में नए सिरे से निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की है।

निविदा प्रक्रिया दोबारा शुरू होने के कारण बायोमेट्रिक सर्वेक्षण में देरी हो गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संशोधित शर्तों के साथ जारी होने वाली नई निविदा को पर्याप्त प्रतिसाद मिलता है या नहीं और सर्वेक्षण का काम आगे बढ़ पाता है या नहीं।

प्रस्तावित बायोमेट्रिक सर्वेक्षण के तहत उपकरप्राप्त इमारतों की कुल संख्या, उनमें मौजूद मकानों की संख्या, निवासियों की संख्या और मकानों के क्षेत्रफल से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। इस जानकारी को कंप्यूटर के माध्यम से संकलित कर म्हाडा की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे आगे निवासियों की पात्रता निर्धारित करने की प्रक्रिया आसान होगी। साथ ही, अत्यंत खतरनाक इमारतों के पुनर्विकास में भी इस आंकड़े का उपयोग किया जा सकेगा। इसके अलावा, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मकानों पर कब्जा करने की घटनाओं पर अंकुश लगाने में भी मदद मिलने की संभावना है।