गोदावरी नहर के कंक्रीटीकरण के विरोध में नासिक में किसानों के साथ धरना देते सांसद राजाभाऊ वाजे।

नासिक जिले में गोदावरी दाहिनी तट नहर के सीमेंट कंक्रीट अस्तरीकरण को लेकर किसानों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। किसानों को आशंका है कि नहर का पूरी तरह कंक्रीटीकरण होने से भूजल पुनर्भरण प्रभावित होगा और कुओं तथा बोरवेल का जलस्तर नीचे जा सकता है। इस मुद्दे पर सांसद राजाभाऊ वाजे ने किसानों के साथ धरना दिया, जबकि सिन्नर की सिमंतिनी कोकाटे ने जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील से मुलाकात कर काम पर रोक लगाने की मांग की।

विवाद की वजह क्या है?

जल संसाधन विभाग की ओर से गोदावरी दाहिनी तट नहर के रखरखाव और मरम्मत के तहत सीमेंट कंक्रीट अस्तरीकरण का काम प्रस्तावित है। हालांकि, नहर के आसपास स्थित कई गांवों के किसान इस काम का विरोध कर रहे हैं।

किसानों का कहना है कि नहर से बहने वाला पानी जमीन में रिसकर आसपास के कुओं, बोरवेल और अन्य जलस्रोतों के पुनर्भरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में नहर का पूरी तरह कंक्रीटीकरण किए जाने से भूजल स्तर पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। किसानों की चिंता है कि इस काम से स्थानीय जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

खेती और पशुपालन पर असर पड़ने की आशंका

गोदावरी नहर के पानी पर आसपास के कई किसानों की खेती, फलोद्यान और सब्जियों का उत्पादन निर्भर है। इसके अलावा पशुपालन के लिए भी पानी की जरूरत होती है।

किसानों ने आशंका जताई है कि नहर के अस्तरीकरण से भूजल पुनर्भरण कम हुआ तो सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता घट सकती है। इसका असर कृषि उत्पादन, फलोद्यान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने की संभावना है।

इसी वजह से किसानों की मांग है कि नहर की मरम्मत करते समय केवल पानी के रिसाव को रोकने पर ध्यान देने के बजाय स्थानीय जलस्रोतों और भूजल स्तर पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाए।

सांसद राजाभाऊ वाजे ने किसानों के साथ किया धरना

इस मुद्दे पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए सांसद राजाभाऊ वाजे ने किसानों के साथ गोदावरी नहर विभाग के कार्यकारी अभियंता के कार्यालय में धरना दिया।

वाजे ने कहा कि नहर के किनारे बसे प्रत्येक गांव की भौगोलिक परिस्थितियां और पानी की जरूरतें अलग-अलग हैं। इसलिए सभी क्षेत्रों में एकसमान तरीके से कंक्रीटीकरण करने के बजाय गांववार परिस्थितियों का अध्ययन किया जाना चाहिए।

आंदोलन के दौरान यह मांग भी उठाई गई कि तकनीकी अध्ययन के माध्यम से यह निर्धारित किया जाए कि नहर के किन हिस्सों में अस्तरीकरण की वास्तविक आवश्यकता है, किन क्षेत्रों में इससे भूजल पुनर्भरण प्रभावित हो सकता है और इसके लिए कौन से वैकल्पिक उपाय अपनाए जा सकते हैं।

सिमंतिनी कोकाटे ने जल संसाधन मंत्री से की मुलाकात

गोदावरी नहर के अस्तरीकरण का मुद्दा अब राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा में आ गया है। सिन्नर की सिमंतिनी कोकाटे ने जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील से मुलाकात कर इस संबंध में ज्ञापन सौंपा।

उन्होंने किसानों के पानी, खेती और भविष्य को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए मांग की कि जरूरी तकनीकी अध्ययन पूरा होने और किसानों से चर्चा किए जाने तक अस्तरीकरण का काम स्थगित रखा जाए।

कोकाटे ने नहर के आवश्यक रखरखाव एवं मरम्मत और सीमेंट कंक्रीट अस्तरीकरण को अलग-अलग पहलुओं के रूप में देखने तथा किसान हितों को प्राथमिकता देने की बात कही।

प्रशासन ने संयुक्त स्थल निरीक्षण का दिया आश्वासन

किसानों के आंदोलन के बाद प्रशासन ने संबंधित नहर क्षेत्र का संयुक्त स्थल निरीक्षण कराने का आश्वासन दिया है। इस निरीक्षण में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ स्थानीय किसान और ग्रामीण भी शामिल होंगे।

निरीक्षण के दौरान गांववार जलस्रोतों की स्थिति, भूजल पुनर्भरण, खेती के लिए पानी की जरूरत और अस्तरीकरण की तकनीकी आवश्यकता की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद स्थानीय किसानों और ग्रामीणों से चर्चा कर उचित समाधान निकालने की बात प्रशासन की ओर से कही गई है।

अंतिम निर्णय पर किसानों की नजर

गोदावरी दाहिनी तट नहर के अस्तरीकरण का मुद्दा अब किसान हितों, भूजल पुनर्भरण और जल प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गया है। एक ओर नहर के रखरखाव और पानी के रिसाव को रोकने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय जलस्रोतों को सुरक्षित रखने की चुनौती भी सामने है।

ऐसे में संयुक्त स्थल निरीक्षण के निष्कर्ष और उसके बाद अस्तरीकरण को लेकर लिया जाने वाला अंतिम निर्णय महत्वपूर्ण होगा। क्षेत्र के किसानों की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

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