आदमापुर में गूंजा ‘बालूमामा के नाम पर चांगभलं’, हजारों भक्तों की मौजूदगी में 134वां जन्मकाल समारोह संपन्न
कोल्हापुर के आदमापुर में सद्गुरु बालूमामा के 134वें जन्मकाल समारोह में उमड़े लाखों श्रद्धालु, पालकी यात्रा और महाप्रसाद का हुआ आयोजन।
तस्वीर में महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के आदमापुर स्थित मंदिर में सद्गुरु बालूमामा के 134वें जन्मकाल समारोह के दौरान उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखाई दे रही है।
महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के भुदरगढ़ तहसील स्थित श्री क्षेत्र आदमापुर में सद्गुरु बालूमामा का 134वां जन्मकाल समारोह शुक्रवार, 23 अक्टूबर को भक्तिमय वातावरण और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गोवा, कोंकण सहित महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र इस धार्मिक स्थल पर आयोजित समारोह में हजारों भक्त शामिल हुए। संत सद्गुरु बालूमामा देवालय समिति, ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के सहयोग से आयोजित इस उत्सव के दौरान पुष्पवर्षा, भंडारे की उधळण, कीर्तन और पालखी समारोह से पूरा परिसर ‘बालूमामा के नाम पर चांगभलं’ के जयघोष से गूंज उठा।
उत्सव के अवसर पर गुरुवार से ही मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। सुबह तीन से पांच बजे तक नित्य पूजा और आरती हुई। इसके बाद सुबह सात से आठ बजे के बीच देवस्थान के अध्यक्ष धैर्यशीलराजे भोसले के हाथों वीणा पूजन कर उत्सव का शुभारंभ किया गया। संत ज्ञानेश्वरी के नौवें और बारहवें अध्याय के साथ सद्गुरु बालूमामा विजय ग्रंथ का पारायण किया गया। शाम को ह.भ.प. नानासाहेब पाटील ने प्रवचन सेवा दी, जबकि रात में ह.भ.प. रामचंद्र पाटील का कीर्तन हुआ।
शुक्रवार को जन्मोत्सव के अवसर पर ह.भ.प. नानासो द. पाटील का कीर्तन आयोजित किया गया। दोपहर 4 बजकर 23 मिनट पर बालूमामा के जन्मकाल का मुख्य समारोह संपन्न हुआ। इस दौरान बालूमामा के पालने पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा की। महिला श्रद्धालुओं ने पारंपरिक पालना गीत प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। राजनंदिनी भोसले, मायादेवी पाटील और उपस्थित सुहागिन महिलाओं के हाथों पालने का पूजन किया गया।
जन्मकाल समारोह के लिए बालूमामा के गर्भगृह को जरबेरा, ऑर्किड, कार्नेशन, जिप्सोफिला, डच फूलों और गुलाब सहित विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया था। मंदिर के सामने बनाई गई विभिन्न रंगों की रंगोलियों और मंदिर तथा कलश पर की गई आकर्षक विद्युत सजावट ने परिसर की शोभा बढ़ाई।
बालूमामा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। पटाखों की आतिशबाजी, ढोल-कैताळ की गगनभेदी आवाज और ‘बालूमामा के नाम पर चांगभलं’ के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा। इस दौरान श्रद्धालुओं ने खुले हाथों से भंडारे की उधळण की और भक्तों को सुंठवड़े का वितरण किया गया। आदमापुर भजनी मंडल के हरिनाम संकीर्तन में श्रद्धालु तल्लीन नजर आए।
बालूमामा के निर्वाण स्थल श्री मरगुबाई मंदिर से समाधि स्थल तक श्री के अश्व के साथ भंडारा लाया गया। इसके बाद श्री की पालखी यात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं और सुहागिन महिलाओं ने पालखी तथा अश्व का औक्षण कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। मंदिर के चारों ओर पालखी की परिक्रमा पूरी होने के बाद महाप्रसाद वितरित किया गया। इसके साथ ही जन्मकाल समारोह का समापन हुआ।
समारोह को शांतिपूर्ण और सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए कोल्हापुर सहित भुदरगढ़ और कागल पुलिस थानों के पुलिसकर्मियों, सुरक्षा रक्षकों, देवस्थान के कर्मचारियों, स्थानीय युवाओं, ग्रामीणों और स्वयंसेवकों ने विशेष सतर्कता बरती। व्यवस्थाओं के कारण श्रद्धालुओं को बालूमामा के दर्शन करने और महाप्रसाद का लाभ लेने का अवसर मिला।
इस अवसर पर देवस्थान के अध्यक्ष धैर्यशीलराजे भोसले, सभी ट्रस्टी, ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। आदमापुर में आयोजित इस 134वें जन्मकाल समारोह में धार्मिक परंपराओं, सामूहिक संकीर्तन, पालखी यात्रा और महाप्रसाद के माध्यम से श्रद्धालुओं ने सद्गुरु बालूमामा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।