लातूर में जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर जीआर की प्रति जलाकर प्रदर्शन करते किसान।

लातूर में क्रांतिकारी किसान संगठन की ओर से राज्य सरकार के सूखे संबंधी जीआर के खिलाफ अनोखे तरीके से हल्लाबोल आंदोलन किया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार ने जीआर जारी कर किसानों के हाथ में भोपला दिया, लेकिन आर्थिक सहायता की घोषणा नहीं की। प्रदेशाध्यक्ष राजीव कसबे के नेतृत्व में जिलाधिकारी कार्यालय के सामने हाथों में भोपला और गाजर लेकर प्रदर्शन किया गया तथा सरकार के सूखा संबंधी जीआर की होली जलाई गई।

क्रांतिकारी किसान संगठन के प्रदेशाध्यक्ष राजीव कसबे के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में संगठन ने कहा कि राज्य सरकार ने कुछ दिन पहले सूखे के संबंध में जीआर जारी किया है, लेकिन इसमें किसानों को आर्थिक सहायता देने के बारे में कुछ भी नहीं बताया गया है। संगठन के अनुसार, मौजूदा स्थिति में किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता देने की जरूरत है, लेकिन सरकार का इस ओर अब तक ध्यान नहीं है। संगठन ने इस जीआर को फर्जी बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों के हाथ में भोपला दिया है।

किसानों की मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रदर्शनकारियों ने हाथों में भोपला और गाजर लेकर हल्लाबोल आंदोलन किया। इस दौरान सरकार के सूखे संबंधी जीआर की होली भी जलाई गई।

क्रांतिकारी किसान संगठन के संस्थापक रविकांत तुपकर के निर्देशानुसार प्रदेश अध्यक्ष राजीव कसबे के नेतृत्व में पूरे राज्य में सरकार के खिलाफ हल्लाबोल आंदोलन किया गया। आंदोलन के दौरान सूखा प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की तत्काल मुआवजा राशि देने की मांग की गई।

संगठन ने नियमित कर्जदार किसानों को दो लाख रुपये का विशेष अनुदान देने, वर्ष 2024 और 2025 के लंबित फसल बीमा की राशि तत्काल किसानों के खातों में जमा करने तथा वर्ष 2026 का फसल बीमा नियमानुसार तत्काल अदा करने की मांग भी की। इसके अलावा खेतिहर मजदूरों के लिए आर्थिक पैकेज देने, पशुओं के लिए बांधने की जगह चारा और पीने का पानी उपलब्ध कराने सहित अन्य मांगें भी रखी गईं।

आंदोलन के बाद मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा गया। इस आंदोलन में क्रांतिकारी किसान संगठन के प्रदेश कार्याध्यक्ष सत्तार पटेल, कोर कमिटी सदस्य राजेंद्र मोरे, जिलाध्यक्ष अरुणदादा कुलकर्णी, प्रज्योत हुडे, नवनाथ शिंदे, श्रीराम चलवाड, मयुर चव्हाण, धनंजय घुटे, नितीन नाईकवाडे, बादल शिंदे, दत्ता किणीकर, विशाल ढोबळे, निलेश बिराजदार, बालाजी शिंदे, रामेश्वर जंगाले सहित बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।

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