14 फीट से ऊंची झोपड़ियों पर तोड़ाव कार्रवाई से बीएमसी में हंगामा, सर्वदलीय विरोध
मुंबई में 14 फीट से ऊंची झोपड़ियों पर अक्टूबर से प्रस्तावित तोड़ाव कार्रवाई को लेकर बीएमसी में हंगामा हुआ। शिवसेना यूबीटी, कांग्रेस और सर्वदलीय नगरसेवकों ने फैसले का विरोध कर पुनर्वास की मांग की।
मुंबई। मुंबई महानगरपालिका की ओर से 14 फीट से अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों पर तोड़ाव कार्रवाई शुरू करने के फैसले को लेकर सोमवार को बीएमसी में भारी हंगामा हुआ। इस कार्रवाई से हजारों परिवारों के बेघर होने की आशंका जताते हुए शिवसेना यूबीटी और कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडलों ने बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े से मुलाकात कर अभियान रोकने की मांग की। वहीं, बीएमसी महासभा में सत्ताधारी भाजपा के सदन नेता गणेश खणकर ने भी इस मुद्दे पर बीएमसी प्रशासन की कड़ी आलोचना की।
गणेश खणकर के रुख का बीएमसी के सभी राजनीतिक दलों के नगरसेवकों ने समर्थन किया और 14 फीट से अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों पर कार्रवाई के फैसले का पुरजोर विरोध किया। नगरसेवकों ने कहा कि झोपड़पट्टियों में रहने वाले गरीब नागरिकों के आशियाने से जुड़े किसी भी फैसले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
पूर्व महापौर और विरोधी पक्ष नेता किशोरी पेडणेकर के नेतृत्व में शिवसेना यूबीटी के प्रतिनिधिमंडल ने बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि अक्टूबर से शुरू होने वाले तोड़ाव अभियान को तुरंत रोका जाए। शिवसेना यूबीटी ने कहा कि अदालत के आदेशों के अनुसार पहले सभी झोपड़ीधारकों की पात्रता की जांच की जाए, उनका पुनर्वास किया जाए और उन्हें पक्के मकान दिए जाएं। इसके बाद ही किसी तरह की कार्रवाई की जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि तोड़ाव अभियान नहीं रोका गया तो मुंबई के सभी वार्ड कार्यालयों पर तालाबंदी आंदोलन किया जाएगा।
कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने भी बीएमसी आयुक्त से मुलाकात कर प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने कहा कि बीएमसी ने पहले 18 फीट तक की झोपड़ियों को संरक्षण देने की बात कही थी। ऐसे में अब अचानक 14 फीट से ऊपर के निर्माण को तोड़ने का फैसला क्यों लिया गया, इस पर स्पष्टीकरण मांगा गया।
बीएमसी महासभा में सर्वदलीय नगरसेवकों ने कहा कि झोपड़पट्टियों में रहने वाले गरीब नागरिकों के आशियाने पर फैसला लेते समय मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। नगरसेवकों के अनुसार केवल ऊंचाई को आधार बनाकर कार्रवाई करने से हजारों परिवार बेघर हो जाएंगे। उन्होंने बीएमसी प्रशासन से इस विवादित फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की।
14 फीट से अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों पर प्रस्तावित तोड़ाव कार्रवाई को लेकर बीएमसी प्रशासन और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेद के बीच पुनर्वास, पात्रता जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया का मुद्दा केंद्र में आ गया है।