लातूर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक चुनाव के लिए 19 सीटों पर महायुति पैनल के उम्मीदवारों ने अधिकारियों को अपने नामांकन पत्र सौंपे।

लातूर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में महायुति पैनल ने बैंक के चेयरमैन और संचालक मंडल के कामकाज पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि पिछले चार वर्षों में किसानों को फसल ऋण नहीं दिया गया। भाजपा के युवा नेता अरविंद पाटील निलंगेकर ने बैंक के सत्ताधारियों से इसका जवाब मांगा और कहा कि पिछले 10 वर्षों में किसानों को केवल एक बार फसल ऋण दिया गया। उन्होंने आगामी 15 दिनों में 15 सवालों के जरिए बैंक के कामकाज को उजागर करने की बात कही। इस बीच, महायुति की ओर से जिला बैंक चुनाव की 19 सीटों के लिए 40 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए हैं।

लातूर जिला मध्यवर्ती बैंक के चुनाव में भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस के महायुति पैनल ने 19 सीटों के लिए 40 उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल किए। इसके बाद भाजपा युवा नेता अरविंद पाटील निलंगेकर, ऋषिकेश कराड, अबोली पाटील, भगवान पाटील तळेगावकर, कपिल माकणे और धर्मपाल देवशेट्टे ने मीडिया से बातचीत की।

इस दौरान अरविंद पाटील निलंगेकर ने कहा कि लातूर जिला मध्यवर्ती बैंक ने पिछले चार वर्षों में किसी भी किसान को फसल ऋण नहीं दिया। इसके बावजूद बैंक के चेयरमैन और संचालक मंडल किसानों के हित में काम करने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों के हितों की बात करने वाले बैंक के सत्ताधारी किसानों और सदस्य किसानों के पैसे से केवल अपने परिवार के सदस्यों से जुड़े उद्योगों को ऋण दे रहे हैं।

निलंगेकर ने बैंक के चेयरमैन के भाई के कारखाने को 130 करोड़ रुपये का ऋण दिए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि आखिर किस आधार पर यह ऋण दिया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि बैंक का कामकाज पारदर्शी और उचित है, तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जिला बैंक को नोटिस जारी कर 8 लाख रुपये का जुर्माना क्यों लगाया? उन्होंने बैंक के चेयरमैन से इन सवालों का जवाब देने की चुनौती दी।

अरविंद पाटील निलंगेकर ने कहा कि जिला बैंक का कथित अव्यवस्थित कामकाज ही महायुति का चुनावी एजेंडा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल बैंक के कामकाज को लेकर दो सवाल उठाए गए हैं, जबकि उनके पास कुल 15 सवालों की प्रश्नावली तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंक के चेयरमैन को पहले इन दो सवालों के जवाब देने चाहिए। इसके बाद आगामी दिनों में अन्य सवाल भी उठाए जाएंगे।

उन्होंने यह भी सवाल किया कि यदि बैंक का कामकाज उचित और पारदर्शी है, तो सत्ताधारियों को चुनाव का सामना करने से डर क्यों लग रहा है। निलंगेकर ने आरोप लगाया कि बैंक में सत्ताधारी पक्ष की ओर से विरोधी उम्मीदवारों के नामांकन रद्द कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

महायुति ने किसानों और बैंक के सदस्य किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि इसी उद्देश्य से जिला बैंक चुनाव में 19 सीटों के लिए 40 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए हैं। चुनाव में बैंक के कामकाज, किसानों को फसल ऋण और ऋण वितरण को लेकर उठाए गए सवालों के जवाब अब राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन गए हैं।

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