कपास आयात शुल्क शून्य करने पर किसानों का विरोध, औसा तहसील कार्यालय के सामने सरकारी फैसले की जलाई होली
केंद्र सरकार के कपास आयात शुल्क शून्य करने के फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र में किसानों का विरोध शुरू हो गया है। लातूर के औसा में क्रांतिकारी शेतकरी संगठन ने सरकारी जीआर की होली जलाकर फैसले पर सवाल उठाए और इसे वापस लेने की मांग की।
लातूर के औसा में कपास आयात शुल्क शून्य करने के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन।
महाराष्ट्र के लातूर जिले में कपास आयात शुल्क शून्य करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ किसानों का विरोध तेज हो गया है। क्रांतिकारी शेतकरी संगठन ने सरकार के इस निर्णय को कपास उत्पादक किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए राज्यभर में आंदोलन किया। इसी कड़ी में औसा तहसील कार्यालय के सामने केंद्र सरकार के जीआर (शासनादेश) की होली जलाकर फैसले का विरोध दर्ज कराया गया।
केंद्र सरकार ने कपास के आयात पर शुल्क शून्य प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। क्रांतिकारी शेतकरी संगठन का आरोप है कि इस फैसले से देश के कपास उत्पादक किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। संगठन ने आशंका जताई कि आयात शुल्क शून्य होने से विदेशों से बड़े पैमाने पर कपास भारत आएगा। इससे पहले से ही सूखे जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहे किसानों को उनकी उपज का उचित दाम नहीं मिल पाएगा।
संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार की यह नीति सोयाबीन और कपास के दाम गिराने वाली है। सोयापेंड और कपास के आयात से जुड़े फैसलों के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान होगा। संगठन का कहना है कि आयात शुल्क खत्म करने का सीधा असर देश के कपास उत्पादकों पर पड़ेगा।
इस मुद्दे को लेकर क्रांतिकारी शेतकरी संगठन की ओर से राज्यभर में विरोध प्रदर्शन किया गया। लातूर जिले के औसा में कार्यकर्ताओं ने तहसील कार्यालय के सामने केंद्र सरकार के जीआर की होली जलाकर अपना विरोध जताया।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजीव कसबे ने केंद्र सरकार से कपास आयात पर शून्य प्रतिशत शुल्क लागू करने का फैसला तत्काल वापस लेने की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि इस निर्णय से घरेलू कपास उत्पादकों के सामने उचित बाजार भाव मिलने का संकट खड़ा हो सकता है।