लातूर के अंकुलगा रानी में मृतक किसान दत्तात्रय कुंभार के परिजनों से मिलते किसान नेता रविकांत तुपकर।   

लातूर। निजी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की कथित कर्ज वसूली से परेशान होकर शिरूर अनंतपाल तालुका के अंकुलगा रानी निवासी दत्तात्रय कुंभार द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना से क्षेत्र में शोक की लहर है। इस घटना के बाद किसान नेता रविकांत तुपकर ने कुंभार परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। परिवार की स्थिति और उसके दुख को देखकर तुपकर भावुक हो गए। उन्होंने माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की कथित कठोर वसूली प्रक्रिया पर तीखा आक्रोश जताते हुए महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।

तुपकर ने दत्तात्रय कुंभार की मौत को केवल आत्महत्या की घटना मानने से इनकार करते हुए गंभीर आरोप लगाया कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कथित उत्पीड़न के कारण हुई यह मौत हत्या के समान है। उन्होंने मामले की गहन जांच कराने और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की मांग की।

रविकांत तुपकर ने आरोप लगाया कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियां कर्ज वसूली के नाम पर महिलाओं और पुरुषों को कथित रूप से मानसिक प्रताड़ना देती हैं। कर्ज चुकाने के लिए दबाव बनाना, कर्जदारों के साथ अपमानजनक व्यवहार करना और वसूली के लिए लगातार तकाजा करना जैसी कथित गतिविधियों के कारण अनेक परिवार मानसिक तनाव में हैं।

उन्होंने कहा कि कर्ज लेने वाले व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, परिवार की परेशानियों और आय के स्रोतों पर विचार किए बिना वसूली के लिए दबाव बनाया जाता है, तो ऐसी प्रक्रियाओं पर नियंत्रण जरूरी है। कर्ज के बोझ से दबे सामान्य परिवारों को सहारा देने के बजाय यदि उन्हें और अधिक मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है, तो यह गंभीर मामला है।

दत्तात्रय कुंभार की मौत से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर के कमाने वाले व्यक्ति के निधन के बाद परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाता है। एक तरफ प्रियजन को खोने का दुख और दूसरी तरफ कर्ज की चिंता, ऐसे दोहरे संकट से परिवार को जूझना पड़ रहा है। तुपकर ने सरकार से इस मामले को संवेदनशीलता के साथ देखने की अपील की।

माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की कर्ज वसूली पर नियंत्रण के मुद्दे पर तुपकर ने महाराष्ट्र सरकार को भी घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि कर्नाटक सरकार ने वर्ष 2025 में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की वसूली प्रक्रियाओं पर नियंत्रण के लिए कानूनी उपाय किए, तो महाराष्ट्र सरकार इस तरह का कानून क्यों नहीं बना सकती।

उन्होंने कहा कि सामान्य नागरिकों, किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को जरूरत के समय कर्ज लेना पड़ता है। लेकिन आर्थिक परेशानियों के कारण यदि वे समय पर कर्ज नहीं चुका पाते और उन्हें कथित मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है, तो उन्हें सुरक्षा देने वाली प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। तुपकर ने महाराष्ट्र सरकार से माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए तत्काल ठोस कानूनी कदम उठाने की मांग की।

तुपकर ने दत्तात्रय कुंभार के परिवार को संकट से बाहर निकालने के लिए सरकार से तत्काल सहायता देने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार को केवल आश्वासन देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके पुनर्वास के लिए ठोस निर्णय लेना जरूरी है।

तुपकर ने सरकार के सामने प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि दत्तात्रय कुंभार की मौत की गहन और निष्पक्ष जांच कराई जाए। कथित उत्पीड़न और कर्ज वसूली के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं। कुंभार परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों से जुड़े परिवार के कर्ज माफ किए जाएं। इसके साथ ही दत्तात्रय कुंभार की पत्नी को सरकारी नौकरी देकर परिवार को स्थायी आर्थिक सहारा दिया जाए। उन्होंने महाराष्ट्र में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की कर्ज वसूली को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कानून बनाने की मांग भी की।

तुपकर ने कहा कि सरकार को दत्तात्रय कुंभार के परिवार को न्याय दिलाने के लिए बिना देरी निर्णय लेना चाहिए। कर्ज वसूली के कथित उत्पीड़न के कारण किसी अन्य परिवार को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े, इसके लिए शासन को कठोर रुख अपनाना होगा। पीड़ित परिवार को सहायता देने के साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी ठोस उपाय किए जाने चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर कुंभार परिवार को न्याय नहीं दिलाया, तो माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की कथित मनमानी के खिलाफ तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।

दत्तात्रय कुंभार की मौत के बाद कर्ज के बोझ से दबे परिवारों की समस्याओं और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की वसूली प्रक्रियाओं का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। परिवार का सहारा छिन जाने के बाद उसे आर्थिक और सामाजिक सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। अब इस मामले में सरकार क्या रुख अपनाती है, शिकायतों की जांच किस तरह होती है और कुंभार परिवार को वास्तविक सहायता कब मिलती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

हालांकि, माइक्रो फाइनेंस कंपनियों पर लगाए गए आरोपों और दत्तात्रय कुंभार की मौत से उनके कथित संबंधों को लेकर आधिकारिक निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाना और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।

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