लातूर बैंक चुनाव में दबाव और जान से मारने की धमकी का आरोप, कांग्रेस उम्मीदवार पर केस दर्ज
लातूर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक चुनाव में रवि धनराज जाधव ने दबाव और जान से मारने की धमकी देकर नामांकन वापस कराने का आरोप लगाया। कांग्रेस उम्मीदवार सर्जेराव मोरे समेत 10 लोगों पर केस दर्ज होने के बाद उम्मीदवारी बरकरार रखने की मांग तेज हुई।
लातूर में जिला बैंक चुनाव विवाद को लेकर भाजयुमो नेताओं ने प्रदर्शन किया।
महाराष्ट्र के लातूर में जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। रेणापुर तालुका विविध कार्यकारी सेवा सहकारी सोसायटी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल करने वाले रवि धनराज जाधव ने आरोप लगाया है कि उन पर दबाव डालकर और जान से मारने की धमकी देकर नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किया गया। इस मामले में कांग्रेस उम्मीदवार सर्जेराव मोरे, शरद कदम समेत कुल 10 लोगों के खिलाफ लातूर के एमआईडीसी पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है। वहीं, रवि जाधव की उम्मीदवारी बरकरार रखने की मांग को लेकर 29 अक्टूबर, गुरुवार को जिला बैंक के निर्वाचन निर्णय अधिकारी के कार्यालय में धरना दिया गया। भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष ऋषिकेशदादा कराड ने सवाल उठाया कि क्या दबाव, गुंडागर्दी और दबाव की राजनीति ही कांग्रेस की संविधान बचाने की नीति है?
लातूर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में रेणापुर तालुका सोसायटी निर्वाचन क्षेत्र से महायुति की ओर से रवि धनराज जाधव ने अपना नामांकन दाखिल किया था। जाधव के अनुसार, 28 अक्टूबर की सुबह कांग्रेस उम्मीदवार सर्जेराव मोरे, शरद कदम और कुछ अन्य लोगों ने दबाव की रणनीति अपनाते हुए उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को जान से मारने की धमकी दी। आरोप है कि उन्हें जबरन नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किया गया और होटल राजधानी में रोककर रखा गया।
जाधव के मुताबिक, रात 11 बजे वह नजर बचाकर होटल से बाहर निकले। इसके बाद उन्होंने लातूर के एमआईडीसी पुलिस थाने में पूरी घटना की विस्तृत लिखित जानकारी दी। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला क्रमांक 0772/2026 के तहत कांग्रेस उम्मीदवार सर्जेराव मोरे, शरद कदम समेत कुल 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
रवि जाधव की उम्मीदवारी बरकरार रखने की मांग को लेकर 29 अक्टूबर, गुरुवार की सुबह भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष ऋषिकेशदादा कराड के नेतृत्व में कार्यकर्ता जिला बैंक के निर्वाचन निर्णय अधिकारी के कार्यालय पहुंचे। उनकी मांग थी कि जाधव की इच्छा के विरुद्ध दबाव में लिया गया नामांकन वापसी का आवेदन खारिज किया जाए और उनकी उम्मीदवारी कायम रखी जाए।
हालांकि, कार्यालय में निर्वाचन निर्णय अधिकारी तथा निवासी उपजिलाधिकारी केशव नेटके उपस्थित नहीं थे। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने उनके कार्यालय कक्ष में ही धरना शुरू कर दिया। अंततः सहायक निर्वाचन अधिकारियों ने ऋषिकेशदादा कराड की निर्वाचन निर्णय अधिकारी नेटके से फोन पर बातचीत कराई। नेटके ने शुक्रवार को इस मामले पर चर्चा कर निर्णय लेने का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना समाप्त कर दिया गया।
इस बीच, रवि जाधव ने सहायक निर्वाचन निर्णय अधिकारियों रवि गडेकर और कच्छवे को ज्ञापन सौंपकर अपनी उम्मीदवारी बरकरार रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि नामांकन वापस लेने का आवेदन उनकी इच्छा के विरुद्ध, कथित तौर पर अपहरण कर दबाव बनाने और जान से मारने की धमकी देने के बाद लिया गया। जाधव ने आवेदन को अस्वीकार करने की मांग करते हुए कहा कि लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने के लिए उनकी उम्मीदवारी कायम रखी जानी चाहिए।
मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर ऋषिकेशदादा कराड के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने एमआईडीसी पुलिस थाने में उपविभागीय पुलिस अधिकारी समरसिंग सालवे और पुलिस निरीक्षक समाधान चवरे से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मामला दर्ज होने के बाद संबंधित व्यक्तियों को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की। साथ ही, पूरे प्रकरण की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान ऋषिकेशदादा कराड ने आरोप लगाया कि लातूर में कांग्रेस के नेताओं द्वारा लगातार तानाशाही, एकाधिकारवादी और दमनकारी राजनीति की जा रही है। उन्होंने रवि जाधव के मामले को इसका उदाहरण बताते हुए कहा कि जब यह स्पष्ट हो गया कि गरीब परिवार से आने वाला युवा कार्यकर्ता रवि जाधव पैसे के लालच में नहीं आएगा, तो कथित तौर पर दबाव की रणनीति अपनाकर गलत तरीके से नामांकन वापसी के आवेदन पर हस्ताक्षर करवाए गए।
कराड ने कहा कि एक ओर कांग्रेस देश में संविधान बचाओ अभियान चला रही है, वहीं लातूर में कांग्रेस संविधान के अनुसार चुनाव कराने से डर रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से होने चाहिए और प्रत्येक व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने रवि जाधव को उनकी इच्छा के अनुसार चुनाव लड़ने का अवसर देने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग की।
इस पूरे मामले में अब शुक्रवार को निर्वाचन निर्णय अधिकारी के स्तर पर होने वाली चर्चा और निर्णय पर नजर रहेगी। रवि जाधव की उम्मीदवारी बरकरार रखने की मांग के साथ यह विवाद चुनाव प्रक्रिया में उम्मीदवार की स्वतंत्र इच्छा और निष्पक्षता से जुड़े सवालों को भी सामने लाता है।