लातूर में डिजिटल अरेस्ट और 28 लाख की ठगी के मामले में कार्रवाई करती साइबर पुलिस थाना।

लातूर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 66 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी से 28 लाख 51 हजार 999 रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। खुद को पुलिस, एटीएस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का अधिकारी बताकर साइबर अपराधियों ने पीड़ित को 122 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने और आतंकवादियों से संबंध होने का आरोप लगाकर गिरफ्तारी की धमकी दी। इस मामले में लातूर साइबर पुलिस ने मध्यप्रदेश, दिल्ली और हरियाणा से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। न्यायालय ने सभी आरोपियों को 6 नवंबर 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

पुलिस के अनुसार, लातूर निवासी 66 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी को अज्ञात साइबर अपराधियों ने संपर्क कर खुद को पुलिस, एटीएस और ईडी का अधिकारी बताया। आरोपियों ने पीड़ित को बताया कि वह 122 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शामिल हैं और उनके आतंकवादियों से संबंध हैं। उन्हें इस मामले में गिरफ्तार किए जाने, जेल की सजा भुगतने और समाज में बदनामी होने का डर दिखाया गया। लगातार धमकियां देकर उन्हें मानसिक दबाव में रखा गया।

इसके बाद साइबर अपराधियों ने बैंक खाते में जमा रकम के सत्यापन का बहाना बनाया। उन्होंने दावा किया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निर्देशानुसार रकम को कुछ विशेष बैंक खातों में हस्तांतरित करना जरूरी है। इस धोखाधड़ी को विश्वसनीय दिखाने के लिए ईडी के नाम से फर्जी पत्र का भी इस्तेमाल किया गया। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के डर से पीड़ित ने आरोपियों के बताए अनुसार अलग-अलग बैंक खातों में कुल 28 लाख 51 हजार 999 रुपये ट्रांसफर कर दिए। इस तरह उन्हें डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाकर लाखों रुपये की ठगी की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए लातूर साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच, बैंक खातों में हुए वित्तीय लेनदेन और अन्य उपलब्ध जानकारियों के आधार पर आरोपियों का पता लगाया। जांच के बाद मध्यप्रदेश, दिल्ली और हरियाणा से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों में अमित शिवनारायण दुबे (उम्र 40 वर्ष, निवासी महावीर कॉलोनी, कटनी, मध्यप्रदेश), अनुराग गणेशदत्ता मिश्रा (उम्र 27 वर्ष, निवासी मंगलनगर, कटनी, मध्यप्रदेश), शिवम माधवसिंह ठाकूर (उम्र 24 वर्ष, निवासी नेनपुर, जिला मंडला, मध्यप्रदेश), अंकित मानसिंग यादव (उम्र 32 वर्ष, निवासी नई दिल्ली), कुनालसिंह नरेंद्रसिंह रावत (उम्र 30 वर्ष, निवासी रविदास बस्ती, दिल्ली) और शिवकुमार नरेंद्रसिंह (उम्र 30 वर्ष, निवासी भारत पीजी, सेक्टर 45, गुरुग्राम, हरियाणा) शामिल हैं।

इस मामले में लातूर साइबर पुलिस थाने में अपराध क्रमांक 05/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

गिरफ्तार सभी छह आरोपियों को 1 नवंबर 2026 को प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट, न्यायालय क्रमांक 4, लातूर के समक्ष पेश किया गया। पुलिस ने न्यायालय से आरोपियों की हिरासत मांगते हुए बताया कि ठगी की रकम के वित्तीय लेनदेन की पूरी कड़ी का पता लगाना, यह जांचना आवश्यक है कि रकम किन-किन बैंक खातों में स्थानांतरित की गई और इस अपराध में अन्य कौन लोग शामिल हैं। इसके अलावा ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों से संबंधित जानकारी जुटाना भी जरूरी है। पुलिस की मांग पर न्यायालय ने सभी छह आरोपियों को 6 नवंबर 2026 तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अमोल तांबे के निर्देशों के अनुसार पुलिस अधीक्षक मंगेश चव्हाण के मार्गदर्शन में की गई। साइबर पुलिस थाने के पुलिस निरीक्षक विवेकानंद पाटील के नेतृत्व में गठित टीम में सहायक पुलिस निरीक्षक अशोक उजगिरे, पुलिसकर्मी विकास नळेगावकर, गफार मिर्झा, विजय खारटमोल, अविनाश मरलापल्ले, रवि जाधव, सुमित कदम, कोंडिबा दंडीमे और अमर सरवदे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मामले की आगे की जांच पुलिस निरीक्षक विवेकानंद पाटील कर रहे हैं।

लातूर पुलिस ने नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली साइबर ठगी से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस के अनुसार, खुद को पुलिस, एटीएस या ईडी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के माध्यम से पूछताछ करना, गिरफ्तारी की धमकी देना, डिजिटल अरेस्ट के नाम पर मानसिक दबाव बनाना और बैंक खातों में जमा रकम के सत्यापन के बहाने पैसे ट्रांसफर करवाना साइबर धोखाधड़ी का गंभीर तरीका है। वास्तव में कोई भी जांच एजेंसी इस तरह नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट करके पैसे हस्तांतरित करने के लिए नहीं कहती।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि अनजान व्यक्तियों को ओटीपी, बैंक खाते का विवरण या निजी जानकारी साझा न करें। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर पैसे मांगने वालों पर भरोसा न करें और पुलिस, ईडी या किसी अन्य सरकारी अधिकारी के नाम से आने वाली अनजान फोन कॉल से सावधान रहें। किसी भी धमकी से घबराकर जल्दबाजी में आर्थिक लेनदेन न करें। साइबर आर्थिक ठगी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें अथवा www.cybercrime.gov.in की आधिकारिक वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कराएं।

साइबर अपराधी तरह-तरह के प्रलोभन और धमकियों के जरिए नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में डिजिटल लेनदेन के दौरान सतर्कता बरतना जरूरी है। नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लातूर पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने की बात कही है और लोगों से किसी भी परिस्थिति में साइबर ठगी के जाल में नहीं फंसने की अपील की है।

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