परिग्रह से मुक्ति ही उत्तम आकिंचन्य धर्म का संदेश, जरूरत के अनुसार करें संग्रह
कोटा के चंद्रप्रभु मंदिर में उत्तम आकिंचन्य धर्म पर मुनि विवर्धन सागर ने परिग्रह से मुक्ति और संग्रह पर नियंत्रण का संदेश दिया।
तस्वीर में घर के बाहर खड़े लोगों के बीच मौजूद सफल छात्रा नीतू कुमावत।
रिद्धि-सिद्धि नगर स्थित चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में गणाचार्य गुरुदेव श्री विराग सागर जी महाराज के सुशिष्य पूज्य मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज, मुनि श्री विश्वनायक सागर जी महाराज सहित मुनि संघ का चातुर्मास धार्मिक उल्लास के साथ चल रहा है। दशलक्षण महापर्व के तहत उत्तम आकिंचन्य धर्म के अवसर पर मंदिर परिसर में दिनभर विभिन्न धार्मिक आयोजन हुए। इस दौरान मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज ने परिग्रह से मुक्ति और संग्रह की प्रवृत्ति पर नियंत्रण को उत्तम आकिंचन्य धर्म का प्रमुख संदेश बताया।
प्रात:काल आयोजित ध्यान शिविर में मुनि श्री ने श्रद्धालुओं को चार प्रकार के ध्यान का अभ्यास कराया। इसके बाद आयोजित प्रवचन सत्र में मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज ने उत्तम आकिंचन्य धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि आकिंचन्य का अर्थ किसी भी वस्तु का संग्रह न करना और परिग्रह से रहित होना है। सिद्ध परमेष्ठी पूर्ण रूप से परिग्रह से मुक्त हैं तथा अष्ट कर्मों का नाश कर चुके हैं। मुनियों के पास भी किसी प्रकार का परिग्रह नहीं होता, इसलिए उन्हें निग्र्रंथ मुनि कहा जाता है।
मुनि श्री ने कहा कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी व्यक्ति को अपने परिग्रह का परिमाण निर्धारित करना चाहिए। आवश्यकता से अधिक संपत्ति एकत्र करना, अनेक घर और वाहन रखना तथा जरूरत से अधिक वस्तुओं का संग्रह करना परिग्रह की प्रवृत्ति को बढ़ाता है।
उन्होंने कहा कि परिग्रह का त्याग केवल बाहरी वस्तुओं को छोड़ना नहीं है, बल्कि संग्रह की प्रवृत्ति पर नियंत्रण करना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। संयम और मर्यादा को जीवन में अपनाकर व्यक्ति धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है तथा अपने गुणों का विकास कर सकता है।
उत्तम आकिंचन्य धर्म के अवसर पर शाम को श्रद्धालुओं ने दीपकों से मुनि श्री की भव्य आरती की। मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा और मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि इस अवसर पर चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन का सौभाग्य प्रेमचंद-विमला देवी तथा अश्वनी दुगेरिया परिवार को प्राप्त हुआ।
प्रवचन के बाद रात्रि 8:45 बजे मंदिर परिसर में आध्यात्मिक भजन संध्या का आयोजन किया गया। ब्रह्मचारी विकेश वर्धन भैयाजी, दिल्ली और संगीतकार ललित जैन की मधुर प्रस्तुतियों से वातावरण भक्तिमय हो गया। ‘आज की शाम गुरु विराग के नाम’ थीम पर आयोजित भजन संध्या में श्रद्धालुओं ने भक्तिगीतों के साथ गुरु भक्ति में सहभागिता की। इस तरह दशलक्षण महापर्व के उत्तम आकिंचन्य धर्म के अवसर पर दिनभर ध्यान, प्रवचन, आरती और भजन संध्या के माध्यम से धार्मिक आयोजन संपन्न हुए।