तस्वीर में भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे।

भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे राजस्थान की राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय, संघर्षशील और चर्चित नाम के रूप में सामने आए हैं। पिछले 35 वर्षों से किसानों, बेरोजगारों, मजदूरों और गरीबों से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार संघर्ष करने के साथ उन्होंने सामाजिक सरोकारों को भी प्राथमिकता दी है। जनसमस्याओं को मजबूती से उठाने और जनहित के आंदोलनों में भागीदारी के चलते उनकी पहचान एक मुखर सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बनी है।

किसानों, बेरोजगारों, मजदूरों एवं गरीबों के लिए संघर्ष उनके सार्वजनिक जीवन का प्रमुख हिस्सा रहा है। राजस्थान की राजनीति में मनोज दुबे को एक जाना-पहचाना नाम बताया जाता है। उन्होंने वर्षों से देश और प्रदेश के साथ-साथ कोटा शहर एवं देहात से जुड़े विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाई है।

शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर भी वे लगातार अपनी बात रखते रहे हैं। बंद होते उद्योगों के मुद्दे पर उन्होंने आंदोलन किया। बेरोजगारों एवं किसानों के लिए किए गए संघर्ष में वे कई बार जेल भी गए। तालाब बचाओ संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में मनोज दुबे तालाबों पर हो रहे अतिक्रमणों का विरोध करते रहे हैं और तालाबों एवं जल संरक्षण के अभियान को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत हैं।

राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ मनोज दुबे शिक्षा क्षेत्र से भी जुड़े हुए हैं। कोटा के सोगरिया स्टेशन क्षेत्र में स्थित उनका कोचिंग संस्थान वंदना कैरियर इंस्टिट्यूट विद्यार्थियों के बीच जाना-पहचाना नाम है। संस्थान का संचालन उनके पुत्र तुषार दुबे द्वारा किया जा रहा है। संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को उत्तम शिक्षा एवं सही मार्गदर्शन देने का कार्य कर रहा है तथा स्थानीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना चुका है।

मनोज दुबे का मानना है कि शिक्षा समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी उद्देश्य से उनका परिवार लंबे समय से शिक्षा क्षेत्र में योगदान दे रहा है। इसके साथ ही वे सामाजिक कार्यक्रमों, जनसंपर्क और स्थानीय समस्याओं के समाधान के प्रयासों में भी सक्रिय रहते हैं।

वे समय-समय पर आमजन की समस्याओं को सरकार एवं प्रशासन तक पहुंचाने का कार्य करते रहे हैं। उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन की कार्यशैली सीधे संवाद और जनसरोकारों पर आधारित मानी जाती है। इसी वजह से शहर के विभिन्न वर्गों में उनकी पहचान सक्रिय रूप से जनहित के मुद्दे उठाने वाले जननेता के रूप में बनी हुई है।

कोटा की सामाजिक एवं राजनीतिक गतिविधियों में उनकी निरंतर सक्रियता उन्हें ऐसे व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत करती है, जो राजनीति के साथ-साथ समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में भी भूमिका निभा रहे हैं। किसानों की समस्याओं को लेकर मनोज दुबे वर्षों से आंदोलन कर रहे हैं और किसानों की समस्याओं का समाधान उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

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