तस्वीर में मंच पर मौजूद अतिथि राष्ट्रीय अधिवेशन की स्मारिका का विमोचन करते दिख रहे हैं।

कोटा, 17 सितंबर। राजस्थान भूगोल परिषद के 52वें राष्ट्रीय अधिवेशन का गुरुवार को कोटा विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में शुभारंभ हुआ। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से प्रख्यात भूगोलवेत्ता, प्राध्यापक, शोधार्थी और विद्यार्थी अधिवेशन में शामिल हुए। अधिवेशन में समकालीन भौगोलिक चुनौतियों, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे विषयों पर अकादमिक मंथन हुआ।

उद्घाटन सत्र में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ मुख्य अतिथि रहे। राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के सेवानिवृत्त प्रो. एच.एस. शर्मा, राजस्थान भूगोल परिषद के अध्यक्ष एवं राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य प्रो. संतोष आनंद तथा कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने कार्यक्रम की अध्यक्षता के रूप में शिरकत की।

भारतीय ज्ञान परंपरा में सतत विकास का आधार

मुख्य अतिथि हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से ही भारत के समग्र विकास की राह प्रशस्त हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय प्राचीन ग्रंथों में सतत विकास की अवधारणा के अनेक संदर्भ मिलते हैं, जो वर्तमान समय में भी प्रासंगिक हैं।

राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के पूर्व डीन प्रो. एच.एस. शर्मा ने विकसित भारत के निर्माण में युवा पीढ़ी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने युवा भूगोलवेत्ताओं का आह्वान किया कि वे शोध में क्षेत्रीय भ्रमण और प्राथमिक आंकड़ों को विशेष महत्व दें। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर किए गए अध्ययन समाज की वास्तविक आवश्यकताओं को समझने और शोध को अधिक उपयोगी बनाने में सहायक होते हैं।

भौगोलिक चिंतन के समकालीन आयामों पर व्याख्यान

अधिवेशन का प्रमुख आकर्षण प्रो. ए.एन. भट्टाचार्य स्मृति व्याख्यान रहा। मुख्य वक्ता डॉ. रोली कंचन ने भूगोल के महत्व, समकालीन भौगोलिक चिंतन और शोध के विभिन्न आयामों पर विचार रखे। उनके व्याख्यान से प्राध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को विषय के नवीन पक्षों की जानकारी मिली।

राजस्थान भूगोल परिषद के अध्यक्ष प्रो. संतोष आनंद ने परिषद के ऐतिहासिक विकास, अकादमिक गतिविधियों और सदस्यता की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परिषद देश की पुरानी अकादमिक संस्थाओं में शामिल है और इसके करीब 900 आजीवन सदस्य हैं।

विषय से आत्मीय जुड़ाव पर कुलगुरु का जोर

अध्यक्षीय संबोधन में कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने कहा कि विश्वविद्यालय अकादमिक एवं शोध गतिविधियों के आयोजन के लिए सदैव तत्पर रहेगा और इसके लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों से आह्वान किया कि किसी भी विषय को केवल एक पाठ्यक्रम या परीक्षा का हिस्सा मानकर न पढ़ें, बल्कि उसकी गहराई, अवधारणा और व्यावहारिक उपयोग को समझने का प्रयास करें।

इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में उपस्थितजनों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई और इस संकल्प को राष्ट्रीय अधिवेशन के साथ जोड़ा।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का उद्देश्य केवल पढ़कर परीक्षा उत्तीर्ण करना नहीं होना चाहिए और न ही शिक्षकों का दायित्व केवल अध्यापन के बदले वेतन प्राप्त करने तक सीमित रहना चाहिए। विषय से आत्मीय जुड़ाव ही ज्ञान को सार्थक बनाता है। उन्होंने कहा कि जिस विषय का अध्ययन या अध्यापन किया जा रहा है, उसके हर छोटे से छोटे पहलू को समझने, उस पर चिंतन करने और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विकसित की जानी चाहिए। इससे शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम न रहकर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देने का साधन बनेगी।

स्मारिका और ‘एनाल्स’ का विमोचन

कार्यक्रम में राष्ट्रीय अधिवेशन की स्मारिका तथा राजस्थान भूगोल परिषद के ‘एनाल्स’ का विमोचन किया गया। परिषद के जनरल सेक्रेटरी प्रो. एच.एस. भट्ट ने परिषद की विभिन्न गतिविधियों से प्रतिभागियों को अवगत कराया।

अधिवेशन के संयोजक प्रो. जे.पी. शर्मा ने अतिथियों, प्रतिभागियों और शोधार्थियों का स्वागत किया। सह-संयोजक डॉ. के.आर. चौधरी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में प्रो. एस.एस. भट्ट सहित विश्वविद्यालय एवं परिषद के पदाधिकारी, शिक्षक और शोधार्थी उपस्थित रहे।

छह तकनीकी सत्रों में 69 शोधपत्र प्रस्तुत

राष्ट्रीय अधिवेशन के तहत छह तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें देश के विभिन्न राज्यों तथा राजस्थान के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से आए 69 संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों ने शोधपत्र प्रस्तुत किए। सत्रों में पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, सततता और समकालीन भौगोलिक मुद्दों से जुड़े विषयों पर अकादमिक विमर्श हुआ।

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