तस्वीर में सिंगापुर में आयोजित 'पुष्पांजलि' समारोह के दौरान मंच पर कलाकारों का समूह नजर आ रहा है, जिसमें कोटा की नृत्यांगना बरखा जोशी भी शामिल हैं.

कोटा की कथक नृत्यांगना बरखा जोशी ने सिंगापुर में आयोजित ‘पुष्पांजलि : ए कथक नृत्यांजलि’ समारोह में अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति से कथक की भाव-भंगिमाओं, लय और नृत्य सौंदर्य का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इंडियन इंटरनेशनल ट्रेनिंग एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स सेंटर के तत्वावधान में आयोजित यह विशेष समारोह भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध गुरु-शिष्य परंपरा और कथक के महान आचार्यों की स्मृति को समर्पित रहा।

16 सितंबर को सिंगापुर में आयोजित समारोह श्री नारायण प्रसाद जी एवं पं. कुंदन लाल गंगानी जी की स्मृति को समर्पित था। कार्यक्रम में कथक की गुरु-शिष्य परंपरा, साधना और कला के प्रति समर्पण को नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से नमन किया गया। समारोह में भारत और सिंगापुर के प्रतिष्ठित कथक कलाकारों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम में पं. चरण गिरधर चांद, विदुषी शोभा कोसर और पं. राजेंद्र कुमार गंगानी ने अपनी प्रस्तुतियों से कथक की विविध रंग-छटाएं प्रस्तुत कीं। इसी क्रम में बरखा जोशी ने भी अपनी प्रस्तुति से समारोह में विशेष आकर्षण जोड़ा। सिंगापुर के बड़े मंच पर उनकी कथक प्रस्तुति को दर्शकों ने सराहा। उनकी प्रस्तुति में कथक की भावपूर्ण अभिव्यक्ति, लयकारी और नृत्य की सुंदरता के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय कला की समृद्ध परंपरा जीवंत हुई।

बरखा जोशी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कथक नृत्य के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। वे कथक नृत्यांगना होने के साथ-साथ राजकीय संगीत विद्यालय, प्रभाकर रामपुर में कथक गुरु के पद पर कार्यरत हैं। नृत्य की साधना और शिक्षण के माध्यम से वे कथक की परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।

‘पुष्पांजलि’ समारोह का आयोजन कथक के महान आचार्य पं. नारायण प्रसाद जी की स्मृति और पं. कुंदन लाल गंगानी जी की जन्म शताब्दी के अवसर पर किया गया। कार्यक्रम में गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कथक की कला साधना को नमन किया गया। कथक के दिग्गज कलाकारों के साथ बरखा जोशी की सहभागिता ने समारोह को विशेष महत्व प्रदान किया। सिंगापुर की धरती पर हुई उनकी प्रस्तुति के माध्यम से कोटा की कला प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय मंच मिला।

समारोह में कथक प्रस्तुतियों के साथ तबले और गायन की संगत ने सांगीतिक वातावरण को समृद्ध किया। पं. फतेहसिंह गंगानी ने तबला संगत की, जबकि प्रख्यात गायक उस्ताद शमिउल्लाह खान की गायन प्रस्तुति ने कार्यक्रम में संगीत का प्रभावशाली आयाम जोड़ा। भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत के इस संगम ने ‘पुष्पांजलि’ को विशिष्ट सांस्कृतिक आयोजन का स्वरूप दिया।

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