कोटा के अकलंक स्कूल में पुरुलिया छऊ नृत्य से साकार हुई महिषासुरमर्दिनी की गाथा
स्पिक मैके के तत्वावधान में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में कलाकारों ने महिषासुरमर्दिनी की गाथा प्रस्तुत कर विद्यार्थियों को लोक कला से जोड़ा।
कोटा के अकलंक पब्लिक स्कूल में आयोजित स्पिक मैके कार्यक्रम के दौरान कलाकारों और अतिथियों का स्वागत करते एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं प्राचार्य।
कोटा के अकलंक पब्लिक स्कूल, बसंत विहार में स्पिक मैके के तत्वावधान में पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध पुरुलिया छऊ लोक नृत्य की प्रभावशाली प्रस्तुति हुई। कलाकारों ने पारंपरिक मुखौटों, आकर्षक वेशभूषा, सशक्त भाव-भंगिमाओं और ऊर्जावान नृत्य के माध्यम से महिषासुरमर्दिनी की पौराणिक गाथा को जीवंत कर दिया। प्रस्तुति ने विद्यार्थियों को भारतीय लोक कलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं से रूबरू होने का अवसर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अकलंक विद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष पीयूष जैन, सचिव अनिमेष जैन, कोषाध्यक्ष कपिल जैन और उपाध्यक्ष वीके जैन ने कलाकारों एवं अतिथियों का स्वागत कर किया। इस अवसर पर संस्थान की विभिन्न इकाइयों के विद्यार्थी और प्राचार्यगण उपस्थित रहे। कलाकारों की प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने उत्साह दिखाया और उनके प्रदर्शन की सराहना कर उत्साहवर्धन किया।
महिषासुरमर्दिनी की कथा के जरिए कलाकारों ने शक्ति, साहस और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया। पुरुलिया छऊ की विशिष्ट नृत्य शैली, पारंपरिक मुखौटों और नाटकीय मुद्राओं ने पौराणिक प्रसंगों को मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों के लिए यह आयोजन मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय लोक परंपराओं, उनकी अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक महत्त्व को समझने का अवसर भी बना।
अकलंक विद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष पीयूष जैन और सचिव अनिमेष जैन ने कहा कि भारतीय लोक कलाएं देश की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं की संवाहक हैं। विद्यार्थियों को इन कलाओं से परिचित कराना आवश्यक है, ताकि वे अपनी विरासत को समझें और उसका सम्मान करें। उन्होंने कहा कि स्पिक मैके जैसे मंच शास्त्रीय एवं लोक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की प्राचार्या डॉ. अर्चना जोशी ने कलाकारों का आभार व्यक्त किया और उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुति की सराहना की। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों में लोक कलाओं के प्रति रुचि, सांस्कृतिक चेतना और भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान विकसित करने का संदेश दिया गया।