सिद्धत्व के लिए मोह और आसक्ति का त्याग जरूरी, मुनि श्री विवर्धनसागर का संदेश
कोटा में मुनि श्री विवर्धनसागर ने द्रव्यसंग्रह की गाथा 14 की व्याख्या कर सिद्धत्व के लिए मोह, आसक्ति और मिथ्यात्व त्यागने का संदेश दिया।
तस्वीर में दिख रहे संत प्रवचन दे रहे हैं और लोग हाथ जोड़कर खड़े हैं।
रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के अंतर्गत गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ससंघ के चातुर्मासिक प्रवास के दौरान धर्मसभा आयोजित हुई। धर्मसभा में मुनिश्री ने द्रव्यसंग्रह की गाथा संख्या 14 की व्याख्या करते हुए सिद्ध भगवान के आठ गुणों का वर्णन किया और सिद्धत्व की प्राप्ति के लिए मोह तथा आसक्ति का त्याग आवश्यक बताया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ने कहा कि संसार के बंधनों से मुक्ति पाने के लिए व्यक्ति को सबसे पहले अपने भीतर के मोह और आसक्ति का त्याग करना होगा। अक्सर व्यक्ति यह मानता है कि परिवार और संसार उसे बांधे हुए हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि व्यक्ति स्वयं अपने मोह-ममता के कारण इन बंधनों को पकड़े रहता है। यदि व्यक्ति दृढ़ संकल्प कर ले तो वह इन आसक्तियों से मुक्त होकर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।
मुनिश्री ने कहा कि दर्शनावरणीय कर्म के नष्ट होने से जीव की दर्शन शक्ति पूर्ण रूप से विकसित होती है। इसी प्रकार ज्ञानावरणीय कर्म के नष्ट होने पर अनंत ज्ञान की प्राप्ति होती है। कर्मों के क्षय से आत्मा के स्वाभाविक अनंत गुण प्रकट होते हैं।
उन्होंने मिथ्यात्व का त्याग करने पर जोर देते हुए कहा कि व्यक्ति को सम्यक् दृष्टि अपनानी चाहिए। सही श्रद्धा और सही दृष्टिकोण के बिना आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त नहीं हो सकता। मुनिश्री ने कहा कि हमें छोटी-छोटी बातों पर अपना ध्यान केंद्रित करने के बजाय जीवन के बड़े उद्देश्यों पर विचार करना चाहिए, क्योंकि मनुष्य के विचार ही उसके व्यक्तित्व और जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं।
मंदिर समिति ने बताया कि चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं मुनि संघ के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य मुकेश कुमार-आशा जैन खटोड़ परिवार, चंचल विहार को प्राप्त हुआ। वहीं सुगंधी देवी एवं महेंद्र बगड़ा परिवार द्वारा संत भवन में आहारचर्या के चौके में विशेष सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
धर्मसभा में सकल समाज अध्यक्ष प्रकाश बज, मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा, पंकज खटोड़, महेंद्र ठाई, टीकम पाटनी, पारस कासलीवाल, राजू पाटनी, पारस लुहाड़िया, ऋषभ बाकलीवाल, जम्बू बज, महेंद्र गोधा, अशोक पापड़ीवाल सहित मंदिर समिति एवं गुरु सेवा संघ परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। धर्मसभा में मुनिश्री ने सिद्धत्व के मार्ग पर मोह, आसक्ति और मिथ्यात्व के त्याग तथा सम्यक् दृष्टि के महत्व को स्पष्ट किया।