कोटा: मुनि विवर्धन सागर ने उत्तम आर्जव धर्म पर दिया प्रवचन
दशलक्षण पर्व पर मुनि श्री ने श्रद्धालुओं को मायाचार का त्याग कर जीवन में निष्कपटता और सरलता अपनाने का संदेश दिया।
तस्वीर में मंदिर परिसर के भीतर श्रद्धालु जैन मुनि के पाद प्रक्षालन की धार्मिक विधि पूरी करते दिख रहे हैं।
कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर स्थित श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के गणधर मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज ने दशलक्षण पर्व के अंतर्गत उत्तम आर्जव धर्म पर प्रवचन करते हुए श्रद्धालुओं को जीवन में सरलता, सहजता और निष्कपट भाव धारण करने का संदेश दिया।
मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य कई बार छोटे से लाभ के लिए स्वार्थ के वशीभूत होकर मायाचारिता का सहारा लेता है और दूसरों को ठगने या धोखा देने से भी पीछे नहीं हटता। उन्होंने कहा कि छल-कपट और धोखे से अर्जित धन का उपयोग कभी सार्थक नहीं हो सकता। अनीति से कमाया गया धन अंततः नष्ट हो जाता है और कई बार रोग, शोक अथवा आकस्मिक परिस्थितियों में व्यर्थ चला जाता है।
मुनि श्री ने धर्म के प्रथमानुयोग में वर्णित प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि जैन धर्म के अनेक उदाहरण बताते हैं कि सरलता और निष्कपटता के मार्ग पर चलने वाले पात्रों ने उच्च पद और श्रेष्ठ जीवन प्राप्त किया, जबकि छल-कपट और धोखे का मार्ग अपनाने वालों को विपरीत परिणाम भुगतने पड़े। उन्होंने श्रद्धालुओं से मायाचारिता का त्याग कर सरलता को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।
शुक्रवार को मुनि श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य निर्मल कुमार, महेंद्र, जम्बू, नीरज, धीरज, विकास एवं अनिमेष अजमेरा परिवार ने प्राप्त किया। रात्रिकालीन सत्र में आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज एवं मुनि संघ से प्राप्त आगम ज्ञान के आधार पर ब्रह्मचारी विकेश वर्धन भैयाजी, दिल्ली द्वारा प्रवचन दिए जा रहे हैं।
मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं सचिव पंकज खटोड़ ने बताया कि 19 सितंबर, शनिवार को पर्वाधिराज दशलक्षण पर्व की अष्टमी के पावन अवसर पर 1008 श्री पुष्पदंत भगवान का मोक्ष कल्याणक दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर प्रातः 8:30 बजे मंदिर जी में निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा।