कोटा में दशलक्षण पर्व: उत्तम शौच धर्म पर रेशु दीदी ने दिया संदेश
बालिता रोड जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व के चौथे दिन विशेष पूजन, महाआरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उमड़े श्रद्धालु।
तस्वीर में बालिता रोड स्थित मंदिर परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते बच्चे दिख रहे हैं।
कोटा। बालिता रोड स्थित मारवाड़ी श्री पदमप्रभु अग्रवाल दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म की भावपूर्वक आराधना की गई। बाल ब्रह्मचारिणी रेशु दीदी के सानिध्य में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सुबह अभिषेक, शांतिधारा एवं संगीतमय पूजन के साथ धार्मिक आयोजन हुए।
सायंकालीन प्रवचन में बाल ब्रह्मचारिणी रेशु दीदी ने कहा कि उत्तम शौच धर्म का अर्थ केवल बाहरी स्वच्छता नहीं, बल्कि मन को लोभ, लालच, ईर्ष्या, छल-कपट और विकारों से मुक्त करना है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार स्वच्छ जल में प्रतिबिंब स्पष्ट दिखाई देता है, उसी प्रकार निर्मल मन में आत्मा का स्वरूप स्पष्ट होता है। संतोष और संयम को जीवन में अपनाकर ही मन की सच्ची शुद्धता प्राप्त की जा सकती है।
रेशु दीदी ने कहा कि दशलक्षण पर्व आत्मावलोकन, आत्मसंयम और आत्मशुद्धि का पर्व है। प्रत्येक धर्म को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखकर उसे जीवन और आचरण में उतारने का प्रयास करना चाहिए।
शाम को महाआरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रश्नमंच एवं बच्चों की एकल नृत्य प्रतियोगिता आयोजित की गई। महिला मंडल की सदस्यों ने मनमोहक प्रस्तुति देकर मंगलाचरण किया। धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के चलते मंदिर परिसर प्रतिदिन भक्तिमय बना हुआ है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने बताया कि अनंत चतुर्दशी तक मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, आरती सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। तीर्थराज श्री सम्मेद शिखरजी से कोटा प्रवास पर आईं बाल ब्रह्मचारिणी रेशु दीदी के सानिध्य में प्रतिदिन होने वाली संगीतमय पूजा में श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं।
समिति के वरिष्ठ सदस्य बाबूलाल जैन, सीए पारस जैन, शंभू जैन, टीकम जैन और अतुल जैन ने बताया कि दशलक्षण पर्व को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक रूप से सजाया गया है। आयोजन में समाज के महिला-पुरुष, युवा एवं बच्चे उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। इस तरह धार्मिक अनुष्ठानों, प्रवचनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से दशलक्षण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म की आराधना और आत्मशुद्धि का संदेश श्रद्धालुओं के बीच पहुंचा।