तस्वीर में मंदिर में मुनिराज के पाद प्रक्षालन की धार्मिक विधि करते हुए लोग नजर आ रहे हैं।   

रिद्धि-सिद्धि नगर स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान आचार्य विराग सागर के गणधर मुनि विवर्धन सागर ने दसलक्षण पर्व के उत्तम शौच धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा कि जीवन में पवित्रता धारण करने के लिए सम्यकत्व आवश्यक है। जो व्यक्ति अपने मन को पूर्ण रूप से धर्म में लगा देता है, वही शौच धर्म का वास्तविक पालन कर सकता है।

मुनिराज ने श्रद्धालुओं को लोभ का त्याग करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि लोभ सभी पापों को जन्म देता है। व्यक्ति के भीतर जब लोभ उत्पन्न होता है तो उसे पूरा करने के लिए वह धीरे-धीरे पापों में धंसता चला जाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लोभ का कोई निश्चित मापदंड नहीं रह गया है।

मुनि विवर्धन सागर ने कहा कि व्यक्ति इस संसार में खाली हाथ आता है और अंततः खाली हाथ ही जाता है। ऐसे में जीवन और मृत्यु के बीच के सफर में इतना अधिक संग्रह करने की चाह क्यों है, इस पर विचार करना आवश्यक है।

मुनि विवर्धन सागर सहित प्रवर्तक मुनि विश्वनायक सागर, मुनि विश्वभद्र सागर, मुनि विश्वास सागर, मुनि विश्वहित सागर एवं मुनि विश्वदक्ष सागर के सानिध्य में श्रद्धालु पर्युषण पर्व का धर्मलाभ ले रहे हैं।

मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि पाद प्रक्षालन का सौभाग्य बसंतीलाल, महेंद्र कुमार, सुशील, मनोज, वीरेंद्र, अभिनंदन एवं उज्ज्वल पाटनी परिवार ने प्राप्त किया।

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