कोटा: महावीर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व पर बच्चों ने दी भावपूर्ण नाट्य प्रस्तुति
तलवंडी स्थित महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में आचार्य ज्ञान सागर पाठशाला के बच्चों ने नाटक के जरिए धर्म और संस्कारों का संदेश दिया।
तस्वीर में कोटा के महावीर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व पर बच्चे और अतिथि मंच पर खड़े हैं।
कोटा। तलवंडी स्थित श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर परिसर में पर्युषण पर्व के अवसर पर आचार्य ज्ञान सागर पाठशाला परिवार की ओर से आयोजित बच्चों की संस्कारमय एवं भावपूर्ण नाट्य प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। बच्चों ने अभिनय, संवाद और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से धर्म, संस्कार और जीवन मूल्यों का संदेश प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक भावनाओं से सराबोर हो गया।
पाठशाला के नन्हे कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति में धर्म के मूल सिद्धांतों, संस्कारों और सद्भावना को मंच पर जीवंत किया। बच्चों के संवाद, अभिनय और प्रस्तुति में आत्मविश्वास के साथ संस्कारों की गहरी छाप दिखाई दी। दर्शकों ने तालियों के साथ बच्चों का उत्साहवर्धन किया और उनकी प्रस्तुति की मुक्तकंठ से सराहना की।
कार्यक्रम में सकल समाज के संरक्षक विमल जैन, अध्यक्ष प्रकाश बज, महामंत्री पदम बरला, कार्याध्यक्ष जे.के. जैन, सरावगी समाज के अध्यक्ष राकेश पाटौदी, भाजपा जिला अध्यक्ष राकेश मडिया सहित समाज के अनेक सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने बच्चों की प्रस्तुति का उत्साहवर्धन किया।
संयोजक मनोज कुमार पाटनी ने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य संयोजक अशोक पाटनी मिश्रोली, नरेन्द्र जैन, छीतरमल कमलेश सांवाल व शिखरचंद मनोज सेठिया परिवार रहा। मुख्य संयोजक मनोज पाटनी ने बताया कि आचार्य ज्ञान सागर पाठशाला पिछले करीब 20 वर्षों से निरंतर संचालित हो रही है। पाठशाला का उद्देश्य बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ संस्कार, संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ना है।
आदि भैया ने पाठशाला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धार्मिक शिक्षा बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला है। कार्यक्रम का मंच संचालन राजकुमार लुहाड़िया एवं कमलेश सावला ने किया। आयोजन को सफल बनाने में महिला संयोजकों ने विशेष भूमिका निभाई। मुख्य संयोजक संयोजक मनोज कुमार पाटनी ने सभी समाजबंधुओं का आभार व्यक्त किया। बच्चों की इस प्रस्तुति ने पर्युषण पर्व के दौरान धर्म, संस्कार और जीवन मूल्यों के संदेश को प्रभावी रूप से सामने रखा।