कोटा के ऋद्धि-सिद्धि नगर स्थित श्री चंद्रप्रभु जिनालय में वर्षा योग-2026 के तहत आयोजित धर्मसभा के दौरान गणधर मुनि श्री 108 विवर्धन सागर जी महाराज का पाद प्रक्षालन करते श्रद्धालु।   

कोटा। सत्य का पालन, सदाचार और पापों से बचने का प्रयास व्यक्ति के जीवन में नैतिकता और पुण्य वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। कुन्हाड़ी स्थित ऋद्धि-सिद्धि नगर के श्री 1008 चंद्रप्रभु जिनालय में विराग वर्धन पावन वर्षायोग-2026 के अंतर्गत आयोजित धर्मसभा में गणधर मुनि श्री 108 विवर्धन सागर जी महाराज ने सत्य के महत्व और पांच पापों से बचने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सत्य बोलने से वचन सिद्धि होती है।

मुनिश्री ने तत्त्वार्थ संग्रह की गाथाओं का उल्लेख करते हुए मिथ्यात्व और अविरति सहित पांच पापों के आस्रव के कारणों को समझाया। उन्होंने कहा कि जब अशुभ आस्रव कम होता है, तब पुण्य में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। व्यक्ति के चेहरे और व्यवहार से उसके मन की स्थिति झलकती है। बनावटी मुस्कान और स्वाभाविक हंसी में अंतर होता है। आचार्य अपने शिष्यों की गतिविधियों पर ध्यान रखते हैं और उनकी त्रुटियों का सुधार करते हैं।

इस अवसर पर शीतलनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक दिवस पर जिनालय में निर्वाण लाडू अर्पित किया गया। मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि मोक्ष कल्याणक के अवसर पर धार्मिक आयोजन किया गया। गणधर मुनि श्री 108 विवर्धन सागर जी महाराज ने शीतलनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक का महत्व बताते हुए कहा कि जैन धर्म में तीर्थंकरों के जीवन से जुड़े कल्याणक आत्मकल्याण, त्याग, तप और संयम की प्रेरणा देते हैं।

धर्मसभा का शुभारंभ चित्र अनावरण, पाद प्रक्षालन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। भोपाल से आईं डॉ. अर्चना जैन ने गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के जीवनवृत्त के विभिन्न भागों की जानकारी दी और ‘कर्म सिद्धांत’ विषय पर अपने विचार रखे।

मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि ग्वालियर और भोपाल से आए गुरु भक्तों ने मुनिश्री का पाद प्रक्षालन किया। धर्मसभा में प्रकाश पहाड़िया, टीकम पाटनी, कैलाश बज, राकेश खटोड़, नेमीचंद जैन, ऋषभ बाकलीवाल, महावीर लुहाड़िया, पदम बज और महेंद्र गोधा सहित समाजजन उपस्थित रहे। धर्मसभा में सत्य, सदाचार, संयम और कर्म सिद्धांत के माध्यम से धार्मिक जीवन में नैतिक मूल्यों के महत्व का संदेश दिया गया।

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