बन बधड़ी पर 9 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे, नवदंपतियों को गृहस्थी का सामान भेंट
जयपुर में बन बधड़ी के अवसर पर 9 जोड़ों का सामूहिक विवाह हुआ। घोड़ियों पर बारात, सिंधी छेज-झूमर और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच नवदंपतियों को नई गृहस्थी के लिए कई उपहार भी भेंट किए गए।
तस्वीर में सामूहिक विवाह समारोह के दौरान लाल सोफे पर बैठे हुए नवविवाहित जोड़े और मेहमान नजर आ रहे हैं।
जयपुर, 23 सितम्बर 2026। “लाडो लाडी आणीन्दो शहज़ादी आणीन्दो...” गीतों की गूंज, घोड़ियों पर सजे-धजे 9 दूल्हे, बैंड की धुनें और सिंधी समाज की पारंपरिक छेज-झूमर ने बुधवार को न्यू सांगानेर रोड स्थित लाइंस पैराडाइज में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह को पारंपरिक रंग दिया। भगवान श्री झूलेलाल सेवा समिति, मानसरोवर के तत्वावधान में आयोजित समारोह में 9 जोड़े विवाह बंधन में बंधे।
विवाह समारोह से पहले अग्रवाल फार्म स्थित शीश महल झूलेलाल मंदिर से दोपहर 2 बजे 9 दूल्हों की बारात निकली। सभी दूल्हे घोड़ियों पर सवार होकर बैंड की धुनों के बीच विवाह स्थल पहुंचे। गिरधारी संभनानी, लालचंद खानवानी, मूलचंद बसंतानी, प्रमोद नावानी, शोभा बसंतानी, रजनी ग्वालानी, सीमा गोलानी सहित शहर के गणमान्य नागरिक भी बारात में शामिल हुए।
पल्लव प्रार्थना के साथ गणेश जी महाराज एवं भगवान श्री झूलेलाल की आराधना कर समारोह का शुभारंभ हुआ। पंडित सतीश शर्मा के आचार्यत्व में विद्वान पंडितों ने सनातन धर्म पद्धति एवं सिंधी रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह की रस्में संपन्न कराईं। भगवान भुवन भास्कर एवं अग्निदेव को साक्षी मानकर 9 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे।
श्री अमरापुर दरबार की संत मंडली, पुरसनाराम मंडल के साईं मुकेश साध, सुंदर ठकुर सहित गणमान्य नागरिकों ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया। महिलाओं ने खुशी के गीतों पर सिंधी नृत्य प्रस्तुत किया। छेज और झूमर की प्रस्तुतियों ने समारोह में उत्साह का माहौल बना दिया।
नवदंपतियों की नई गृहस्थी बसाने के उद्देश्य से समाज के लोगों ने विभिन्न उपहार प्रदान किए। श्री अमरापुर दरबार की ओर से कन्या को साड़ी, गोवर्धन आसनानी ने स्वर्ण मंगलसूत्र, प्रमोद नावानी ने स्वर्ण अंगूठी, हनी लखवानी ने ब्रांडेड फ्रिज, नन्दलाल वासुजा ने वाशिंग मशीन, धीरज विशनानी ने ड्रेसिंग टेबल, दीनदयाल वाधवानी ने दूल्हे का सूट तथा शोभा बसंतानी ने दुल्हन का बेस प्रदान किया। इसके अलावा कपड़े, बर्तन और घरेलू उपयोग की अनेक वस्तुएं भी नवदंपतियों को भेंट की गईं।
समन्वयक तुलसी संगतानी ने बताया कि सिंधी समाज में वामन जयंती का विशेष महत्व है और इसे अबूझ सावे के रूप में भी माना जाता है। चौमासे के दौरान सामान्य विवाह मुहूर्त उपलब्ध नहीं होने पर वामन जयंती के अवसर पर विवाह संस्कार संपन्न कराने की परंपरा रही है। इसी परंपरा के तहत बन बधड़ी पर 9 जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया गया।
समारोह की व्यवस्थाओं में कन्हैया लाल लखवानी, किशन चंद कुंदनानी, अर्जुन ढोलानी, भागचंद बच्चानी, पम्मन मल सोढानी, केसामल खानवानी सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया। समारोह में विवाह संस्कार के साथ सिंधी समाज की पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामुदायिक सहयोग की परंपरा भी दिखाई दी।