जयपुर में हिंदी कार्यशाला: राष्ट्रीय एकता और आत्मसम्मान का प्रतीक बताया हिंदी को
जयपुर में पीआईबी और सीबीसी के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी राजभाषा पखवाड़ा के तहत कार्यशाला हुई। शास्त्री कोसलेन्द्रदास और निदेशक अनुभव बैरवा ने हिंदी के महत्व पर विचार रखे, कविता व भाषण प्रतियोगिता भी हुई।
तस्वीर में जयपुर स्थित कार्यालय में 'राजभाषा हिंदी पखवाड़ा' के बैनर के सामने मंच पर बैठे अतिथि और अधिकारी नजर आ रहे हैं।
पत्र सूचना कार्यालय एवं केंद्रीय संचार ब्यूरो, प्रादेशिक कार्यालय, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी राजभाषा पखवाड़ा के तहत 23 सितंबर 2026 को कार्यालय परिसर के प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल में एक दिवसीय हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में हिंदी के महत्व, भारतीय भाषाओं के विकास और कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के प्रयोग पर विचार रखे गए। इस दौरान कविता एवं भाषण प्रतियोगिता भी आयोजित हुई, जिसमें प्रादेशिक कार्यालय और क्षेत्रीय इकाइयों के कार्मिकों ने प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के दर्शन संकायाध्यक्ष शास्त्री कोसलेन्द्रदास ने भारतीय भाषाओं के ऐतिहासिक और संवैधानिक विकासक्रम पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संस्कृत सभी भारतीय भाषाओं की जननी है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में भाषाई चिंतन का नया दौर शुरू हुआ और राजभाषा समिति का गठन किया गया।
शास्त्री कोसलेन्द्रदास ने कहा कि हिंदी एक विशाल समुद्र की तरह समावेशी भाषा है, जो सभी को अपने में समाहित कर लेती है। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार हिंदी को जब भी नवीन शब्दावली की आवश्यकता होती है, वह अपनी जननी संस्कृत से ही ऊर्जा और शब्द ग्रहण करती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज विश्व के अनेक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में हिंदी का अध्ययन-अध्यापन हो रहा है और यह दुनिया की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा बन चुकी है।
उन्होंने सभी से भाषाई संकोच त्यागकर हिंदी में कार्य करने और नई पीढ़ी को भी अपनी भाषा में संवाद के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर पत्र सूचना कार्यालय के निदेशक श्री अनुभव बैरवा ने कहा कि हिंदी केवल कुछ शब्दों या व्याकरण का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक पहचान और आत्मसम्मान का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह हमारी पहचान और हमारी मिट्टी की खुशबू है।
श्री अनुभव बैरवा ने वर्तमान समय में हिंदी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि डिजिटल क्रांति, सोशल मीडिया, सिनेमा और पत्रकारिता ने हिंदी के दायरे को और अधिक विस्तृत किया है। दुनिया भर में लोग हिंदी को जानने और समझने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा के प्रति गौरव का भाव रखते हुए हिंदी को दैनिक कार्यशैली और व्यवहार में पूर्ण रूप से आत्मसात करना चाहिए।
निदेशक श्री अनुभव बैरवा ने कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से विभागीय प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक भाग लेने का आह्वान किया।
कार्यशाला के दौरान कार्मिकों की रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कविता एवं भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। केंद्रीय संचार ब्यूरो, प्रादेशिक कार्यालय, जयपुर की 7 इकाइयों के क्षेत्रीय प्रचार सहायकों, तकनीकी सहायकों एवं विभागीय कलाकारों ने प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यशाला के समापन अवसर पर पत्र सूचना कार्यालय के उपनिदेशक श्री धर्मेश भारती ने मुख्य अतिथि, निदेशक महोदय तथा उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला में कार्यालय के सभी कार्मिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के माध्यम से हिंदी के कार्यालयीन प्रयोग, भाषाई अभिव्यक्ति और रचनात्मक सहभागिता को लेकर कार्मिकों की भागीदारी सामने आई।