तस्वीर में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा पुलिस मुख्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए नजर आ रहे हैं।

जयपुर, 23 सितम्बर। जीवन के महत्वपूर्ण दशक खाकी वर्दी में कानून-व्यवस्था संभालने वाले पुलिसकर्मियों को अब सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और अन्य वित्तीय परिलाभों के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सेवानिवृत्त होने वाले पुलिसकर्मियों की सहायता के लिए शीघ्र ही जिला पुलिस कार्यालयों में ‘पेंशन मित्र’ स्थापित किए जाएंगे। साथ ही पेंशनर्स को डिजिटल रूप से सशक्त किया जाएगा।

मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने बुधवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय पेंशन अदालत के दौरान पुलिस अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने राजस्थान की पेंशन व्यवस्था को देश में सबसे बेहतर और संवेदनशील बनाने तथा पेंशन सुधार के तहत राज्य स्तरीय पेंशन अदालत की शुरुआत की।

इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के साथ पेंशनर्स से संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनकर समाधान के निर्देश दिए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न जिलों से जुड़े पेंशनर्स ने मुख्य सचिव के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। पेंशनर्स की विभिन्न समस्याओं पर मुख्य सचिव ने त्वरित समाधान का आश्वासन दिया। महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि पुलिस मुख्यालय की ओर से पेंशनर्स की समस्याओं के त्वरित समाधान में हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में पेंशन व्यवस्था को अधिक सुगम, पारदर्शी और संवेदनशील बनाया जा रहा है। इस पहल से सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों को पेंशन और अन्य वित्तीय लाभ सेवानिवृत्ति के दिन या उससे पहले ही प्राप्त हो सकेंगे। पेंशन अदालत कार्यक्रम में सितंबर माह में सेवानिवृत्त होने वाले विभिन्न 22 पुलिसकर्मियों को पीपीओ किट देकर गौरवमयी सेवानिवृत्ति की शुभकामनाएं दी गईं।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि कार्मिक को सेवानिवृत्ति के दिन ही या उससे पहले पीपीओ यानी पेंशन पेमेंट ऑर्डर मिल जाना चाहिए। उन्होंने इसे उनके जीवन की सबसे बड़ी वित्तीय सुरक्षा बताया। पुलिस कार्मिकों की पेंशन संबंधी शिकायतों का 30 दिन के भीतर अनिवार्य रूप से निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इसके लिए विशेष अभियान चलाने को भी कहा गया।

मुख्य सचिव ने जिलों के थानों या पुलिस कार्यालयों में ‘पेंशन मित्र’ स्थापित करने के निर्देश दिए, ताकि पेंशनर्स को आवेदन करने से लेकर आगे की प्रक्रिया तक किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो। उन्होंने सभी पुलिस पेंशनर्स को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए जीवन प्रमाण पत्र के आवेदन ऑनलाइन ही करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे चिकित्सालयों में, जहां पुलिस पेंशनर्स उपचार के लिए अधिक संख्या में आते हैं, उनके लिए पृथक काउंटर की व्यवस्था की जाए।

पुलिस सेवा में अपने जीवन के महत्वपूर्ण दिन देने वाले पुलिसकर्मी अब सेवानिवृत्ति के समय अपने अनुभव भी लिखेंगे। ये अनुभव क्षेत्र विशेष में पुलिस व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने में मददगार साबित होंगे। मुख्य सचिव ने पुलिस अधिकारियों को पेंशन से जुड़े कानूनी मामलों यानी लिटिगेशन का आपसी समन्वय से ‘आउट ऑफ कोर्ट’ ही निस्तारण कराने के निर्देश दिए।

8वें वेतन आयोग को लेकर पेंशनर्स के मन में फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए मुख्य सचिव ने बताया कि 8वें वेतन आयोग से हुई उनकी चर्चा में राज्य सरकार की ओर से किसी भी प्रकार का कोई अंतर नहीं रखा जाएगा। सरकार ने इस संबंध में नियमानुसार लाभ देने के लिए हाल ही में आयोग को पत्र भी जारी किया है।

मुख्य सचिव ने पेंशनर्स से निरंतर संवाद बनाए रखने के लिए रिटायर्ड पुलिस पेंशनर्स एसोसिएशन का गठन करने को कहा। इससे पेंशनर्स की छोटी-छोटी समस्याओं का भी जिलों में ही निस्तारण संभव हो सकेगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समयबद्ध पेंशन और सुशासन के विजन के तहत राजस्थान की पेंशन नीति और प्रक्रिया देश में सबसे बेहतर है। उन्होंने कहा कि तमाम सुधारों के बीच पेंशन सुधार बेहद आवश्यक हैं, जो ‘विकसित भारत-जन सेवा अभियान’ की सफलता की नींव हैं। इस पहल से राज्यभर के सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों में नई उम्मीद जगी है।

पेंशन अदालत में बड़ी संख्या में पेंशनर संगठनों के प्रतिनिधि भी पहुंचे। राजस्थान सेवानिवृत्त पुलिस कल्याण संस्थान के रिछपाल पुनिया, पेंशन मंच के सूरजप्रकाश टांक और पेंशनर समाज के शंकरसिंह सहित कई पेंशनर्स ने राज्य सरकार की ओर से पेंशनर्स को दी जाने वाली सुविधाओं के लिए आभार जताया। उन्होंने मुख्य सचिव की पहल पर आयोजित पेंशन अदालत को भी पेंशनर्स के लिए हितकारी बताया।

पेंशन अदालत के बाद मुख्य सचिव ने अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने प्राप्त समस्याओं के संबंध में अधिकारियों से तथ्यात्मक जानकारी ली और समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए। इस दौरान डीजीपी श्री राजीव कुमार शर्मा ने पुलिस मुख्यालय की डिजिटल पहल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों, पेंशनर्स और आश्रितों की समस्याओं के लिए राजकॉप सिटीजन ऐप में विशेष फीचर उपलब्ध कराया गया है। इसके माध्यम से पेंशन, चिकित्सा बिल प्रतिपूर्ति सहित विभागीय और व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं घर बैठे दर्ज कराने की सुविधा है। उन्होंने पेंशनर्स से इस फीचर का उपयोग करने का आह्वान भी किया।

बैठक में राजकॉप सिटीजन ऐप में उपलब्ध पेंशनर्स हितैषी सुविधाओं से मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास बेहद प्रभावित हुए। उच्चस्तरीय पेंशन अदालत में प्रशासनिक और पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इनमें पुलिस महानिदेशक श्री संजय अग्रवाल, श्री आनंद श्रीवास्तव, श्रीमती मालिनी अग्रवाल, कार्मिक सचिव श्रीमती अर्चना सिंह और विशिष्ट सचिव वित्त (बजट) श्रीमती शिवांगी स्वर्णकार सहित पुलिस सेवा के अन्य उच्चाधिकारी शामिल थे। बैठक में विभिन्न पेंशन संगठनों के पदाधिकारियों और पेंशनर्स से पूरी संवेदनशीलता के साथ संवाद किया गया।

बैठक से पहले मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास के पुलिस मुख्यालय पहुंचने पर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) श्री संजय अग्रवाल ने उनका स्वागत किया। राज्य स्तरीय पेंशन अदालत के माध्यम से पेंशन प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण, डिजिटल सुविधाओं और जिला स्तर पर ‘पेंशन मित्र’ की व्यवस्था को लेकर पुलिस पेंशनर्स के लिए सेवानिवृत्ति के बाद की प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

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