राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन में राजस्थान की बड़ी छलांग, क्लस्टर गठन में दूसरा और किसान पंजीकरण में तीसरा स्थान

राजस्थान राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन में लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। क्लस्टर गठन में दूसरा और किसान पंजीकरण में तीसरा स्थान हासिल करने के साथ 2 लाख से अधिक किसान 91 हजार हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं। जानिए सरकार की योजनाओं और मिशन की पूरी तस्वीर।

Update: 2026-07-30 11:27 GMT

तस्वीर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और एक महिला पूजा स्थल पर हाथ जोड़कर बैठे हुए नजर आ रहे हैं, जिन्हें फूलों और गेंदे की मालाओं से सजाया गया है।

जयपुर, 30 जुलाई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। राज्य सरकार ढाई लाख किसानों को जोड़कर एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हुए टिकाऊ कृषि व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत प्रदेश में अब तक 2 हजार 380 क्लस्टर गठित किए जा चुके हैं। क्लस्टर गठन के मामले में राजस्थान आंध्र प्रदेश के बाद देश में दूसरे स्थान पर है। इन क्लस्टरों से प्रदेश के 2 लाख 12 हजार 346 किसान जुड़ चुके हैं, जो आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बाद देश में तीसरी सबसे बड़ी संख्या है। इसके साथ ही राज्य में अब तक लगभग 91 हजार 166 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनाई जा चुकी है, जिससे राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 तक लगभग 49 करोड़ 97 लाख रुपये व्यय किए गए हैं।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को मिशन मोड पर आगे बढ़ा रही है। प्रदेश में 50 हजार किसानों को गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना के तहत जैविक खाद उत्पादन के लिए 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। किसानों को जैविक उत्पादों के बेहतर विपणन की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जोधपुर, कोटा और उदयपुर में ऑर्गेनिक फूड मार्केट स्थापित किए जा रहे हैं।

राज्य सरकार पारंपरिक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए बैलों से खेती करने वाले किसानों को 30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दे रही है। गौ संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राज्य की गोशालाओं को 2 हजार 856 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है। वहीं बजट 2025-26 में कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर नैचुरल फार्मिंग की स्थापना का प्रावधान किया गया है, जो अनुसंधान, प्रशिक्षण और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनेगा।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन की शुरुआत 25 नवंबर 2024 को की गई थी। मिशन का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना तथा किसानों की आय बढ़ाना है। यह मिशन केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रमाणन और विपणन की समग्र सुविधा भी उपलब्ध कराता है। इसके तहत देशभर में 527 कृषि विज्ञान केंद्र, 76 कृषि विश्वविद्यालय, 194 स्थानीय प्राकृतिक खेती संस्थान तथा 18 उत्कृष्टता केंद्र किसानों को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार किसानों को प्रति एकड़ प्रति वर्ष 4 हजार रुपये की प्रोत्साहन सहायता राशि दो वर्षों तक उपलब्ध करा रही है। नीति आयोग की मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक खेती अपनाने वाले लगभग 91 प्रतिशत किसानों के उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि लगभग 90 प्रतिशत किसानों की उत्पादन लागत में कमी आई है। इसके साथ ही मिट्टी के स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण सुधार देखा गया है।

प्राकृतिक खेती को पर्यावरण संरक्षण, किसानों की आय में वृद्धि और भावी पीढ़ियों के लिए स्वस्थ कृषि व्यवस्था का आधार बताया गया है। इसे समृद्ध किसान, स्वस्थ समाज और सुरक्षित पर्यावरण की आधारशिला माना गया है। सरकार का मानना है कि जब किसान प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर खेती करेगा, तभी विकसित भारत और विकसित राजस्थान के संकल्प को नई गति मिलेगी।

प्राकृतिक कृषि ऐसी कृषि पद्धति है, जिसमें प्रकृति के अनुरूप खेती की जाती है और मिट्टी, जल, जैव विविधता तथा सूक्ष्मजीवों के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने पर विशेष बल दिया जाता है। इस पद्धति में स्थानीय संसाधनों, विशेषकर देशी गाय आधारित जैविक घोल, फसल अवशेष, मल्चिंग तथा मिश्रित खेती का उपयोग किया जाता है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होने से किसानों की उत्पादन लागत घटती है और उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद उपलब्ध होते हैं।

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