मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मिशन मधुहारी ने बदली टाइप-1 डायबिटीज उपचार की तस्वीर, एआई नवाचार बना राष्ट्रीय मिसाल
राजस्थान सरकार का मिशन मधुहारी टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों के लिए एआई आधारित उपचार और डिजिटल निगरानी का नया मॉडल बनकर सामने आया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार और तकनीक आधारित उपचार व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रही है। इसी क्रम में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का ‘मिशन मधुहारी’ टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों और युवाओं के लिए आधुनिक उपचार, डिजिटल निगरानी और समग्र देखभाल का प्रभावी मॉडल बनकर सामने आया है। राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक टाइप-1 डायबिटीज के कारण किसी भी बच्चे की मृत्यु न होने देना है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शुरू किया गया यह अभियान न केवल प्रदेश के हजारों परिवारों को नई उम्मीद दे रहा है, बल्कि देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र के लिए भी अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभर रहा है।
राजस्थान में अनुमानित रूप से लगभग 53 हजार लोग टाइप-1 डायबिटीज के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इस चुनौती को देखते हुए राज्य सरकार ने उपचार, निगरानी, जागरूकता और आधुनिक तकनीक को एक मंच पर लाकर मिशन मधुहारी की शुरुआत की। वर्तमान में प्रदेश के 41 जिलों में 120 विशेष टाइप-1 डायबिटीज क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं और आगामी तीन महीनों में 80 अतिरिक्त क्लीनिक स्थापित किए जाएंगे। अब तक 2 हजार 817 मरीजों का पंजीकरण किया जा चुका है और उन्हें मिशन मधुहारी एप के माध्यम से डिजिटल रूप से ट्रैक किया जा रहा है। इनमें 99 प्रतिशत मरीज बेसल-बोलस इंसुलिन उपचार पद्धति का पालन कर रहे हैं, जबकि हजारों मरीजों की नियमित HbA1c जांच और सतत फॉलोअप सुनिश्चित किया जा रहा है। मिशन मधुहारी के अनुभवों के आधार पर केंद्र सरकार ने विद्यालयों में टाइप-1 डायबिटीज की सक्रिय स्क्रीनिंग को अपने दिशा-निर्देशों में शामिल किया है। मिशन का विस्तार निजी अस्पतालों तक भी किया जा रहा है ताकि प्रत्येक मरीज का डिजिटल पंजीकरण और समग्र उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि मिशन की शुरुआत स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के व्यापक मूल्यांकन से हुई। मार्च 2024 में सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों का आकलन किया गया और जून 2024 में विलियम जे. क्लिंटन फाउंडेशन के सहयोग से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस नवाचार की शुरुआत हुई। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और नागौर के चयनित अस्पतालों में पायलट प्रोजेक्ट लागू करने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में विस्तारित किया गया। प्रारंभिक अध्ययन में उपचार प्रणाली में मानकीकरण की कमी, प्रशिक्षित मानव संसाधन का अभाव, इंसुलिन उपलब्धता में असमानता और रेफरल प्रणाली की कमजोरियां सामने आईं, जिन्हें मिशन के माध्यम से व्यवस्थित रूप से दूर किया गया।
मिशन के तहत मरीजों को इंसुलिन, ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स, लैंसेट और लॉगबुक निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस वर्ष लगभग 4 हजार मरीजों के लिए Continuous Glucose Monitoring (CGM) की व्यवस्था भी की गई है, जिससे रक्त शर्करा की निरंतर निगरानी संभव होगी। मिशन के अंतर्गत 500 से अधिक चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। नियमित ऑनलाइन मेडिकल एजुकेशन, केस आधारित चर्चा और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के माध्यम से उपचार की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। साथ ही आशा और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के माध्यम से गांव-गांव तक जागरूकता और मरीजों की पहचान का अभियान भी संचालित किया जा रहा है।
मिशन मधुहारी की सबसे बड़ी विशेषता आधुनिक डिजिटल तकनीकों का समावेश है। राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने ‘MadhuRoop AI Digital Twin’ जैसी अत्याधुनिक तकनीक विकसित की है। यह प्रणाली मरीजों के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण कर भविष्य में हाइपो और हाइपर ग्लाइसीमिया के जोखिम का पूर्वानुमान लगाने, चिकित्सकीय निर्णय लेने और समय पर उपचार सुनिश्चित करने में सहायता करेगी। इसी प्रकार मधु नेत्र एआई के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डायबिटिक रेटिनोपैथी स्क्रीनिंग शुरू की गई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में इस प्रकार की एआई आधारित स्क्रीनिंग लागू करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है। यह प्रणाली 90 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ आंखों की गंभीर जटिलताओं की प्रारंभिक पहचान करने में सक्षम है। इसे सात जिलों में सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है। इस नवाचार को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार-2026 से भी सम्मानित किया गया है।
मिशन मधुहारी केवल दवा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों के संपूर्ण जीवन प्रबंधन पर भी केंद्रित है। इसके अंतर्गत मधुहारी बैंक के माध्यम से इंसुलिन और अन्य आवश्यक सामग्रियों की सतत उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। मधुहारी कैंपस पहल के तहत प्रदेश के 205 सरकारी विद्यालयों और 41 महाविद्यालयों को टाइप-1 डायबिटीज अनुकूल बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थी परीक्षा और अध्ययन के दौरान बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। वहीं, मधुरंग के माध्यम से मरीजों के बीच संवाद और सामुदायिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि मधुवाणी के जरिए 104 हेल्पलाइन पर चौबीसों घंटे परामर्श उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।
राज्य सरकार ने मिशन के अंतर्गत क्लीनिकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र एजेंसियों से मूल्यांकन कराकर प्लैटिनम, गोल्ड और सिल्वर श्रेणी का मूल्यांकन तंत्र विकसित किया है। प्रत्येक क्लीनिक में क्यूआर आधारित फीडबैक प्रणाली भी स्थापित की गई है, ताकि मरीजों की संतुष्टि के आधार पर सेवाओं में निरंतर सुधार किया जा सके। राजस्थान देश का पहला राज्य है, जिसने टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के लिए ‘मधुस्माइल वेलबीइंग इंडेक्स’ विकसित किया है। यह मरीजों के भावनात्मक, सामाजिक, शैक्षणिक और आत्म-प्रबंधन संबंधी पहलुओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन करता है। प्रारंभिक अध्ययन में प्रतिभागियों का औसत वेलबीइंग स्कोर 78.9 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि अधिकांश प्रतिभागियों ने ‘गुड’ अथवा ‘हाई’ श्रेणी में स्थान प्राप्त किया। अध्ययन से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर बच्चों और किशोरों के भावनात्मक तथा सामाजिक सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मिशन मधुहारी उपचार, तकनीक, जागरूकता और गुणवत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत कर टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों और युवाओं के लिए दीर्घकालिक एवं व्यवस्थित स्वास्थ्य प्रबंधन का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है।