गुरु पूर्णिमा पर देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने पाली-सिरोही में संतों का किया सम्मान, मुख्यमंत्री का गुरु वंदन संदेश किया भेंट
गुरु पूर्णिमा पर देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने पाली और सिरोही में संतों का सम्मान कर मुख्यमंत्री का गुरु वंदन संदेश भेंट किया। जानिए पूरा कार्यक्रम।
तस्वीर में दिख रहे राजस्थान के देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत पाली जिले में गुरु वंदन कार्यक्रम के दौरान एक संत/पुजारी को शॉल, श्रीफल और शुभकामना पत्र सौंपकर सम्मानित करते हुए।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार ने पूरे प्रदेश में 516 पूज्य संतों और महंतों के सम्मान का विशेष अभियान चलाया। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस पहल के तहत पाली जिले में भव्य "गुरु वंदन कार्यक्रम" आयोजित किया गया, जिसमें देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने विभिन्न आश्रमों, मठों और मंदिरों का दौरा कर संतों का अभिनंदन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की ओर से विशेष रूप से प्रेषित ‘‘गुरू वंदन संदेश’’ संतों को भेंट किया तथा प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत मंत्री श्री कुमावत बूसी स्थित प्रसिद्ध त्यागी आश्रम पहुंचे, जहां आयोजित संत सम्मान समारोह में उन्होंने परम पूज्य संत श्री 1008 पुष्करदास महाराज का अभिनंदन किया। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर से भेजा गया ‘‘गुरू वंदन संदेश’’, श्रीफल (नारियल), शाल, दुपट्टा, मिठाई तथा 2100 रुपए की नकद राशि भेंट कर महाराज श्री का आशीर्वाद लिया।
इसके बाद देवस्थान मंत्री ग्राम पंचायत बालराई पहुंचे, जहां उन्होंने डोवेश्वर महादेव महाराज एवं श्री श्री 1008 कुबाजी महाराज के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने मंदिर के पंडित बालुदास वैष्णव एवं पंडित जोगाराम पुजारी को श्रीफल, शॉल तथा मुख्यमंत्री का शुभकामना-पत्र भेंट कर सम्मानित किया। इसके उपरांत श्री कुमावत सुमेरपुर स्थित साकेत आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने परम पूज्य श्री श्री 1008 रामानंद सरस्वती महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। तत्पश्चात उन्होंने सुमेरपुर स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर में महादेव के दर्शन एवं पूजन किया। यहां मंदिर के पुजारी अशोक पंडित को शॉल ओढ़ाकर, श्रीफल एवं मिठाई भेंट की गई तथा मुख्यमंत्री की ओर से प्रेषित शुभकामना-पत्र देकर गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दी गईं।
सुमेरपुर में आयोजित कार्यक्रमों में नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष अनोप सिंह राठौड़, जिला उपाध्यक्ष पूनम सिंह परमार, नगर मण्डल अध्यक्ष रविकांत रावल, पूर्व अध्यक्ष महेंद्र माली, सांडेराव मण्डल अध्यक्ष मुकेश मोदी, समाजसेवी नटवर रामीणा, साकेत आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष मदन सिंह राजपुरोहित, संरक्षक प्रेम सिंह सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त किसान केसरी भंवर चौधरी, सेवानिवृत बीईईओ रामलाल कुमावत, खौड़ मण्डल अध्यक्ष हुकम सिंह खरोकड़ा, खुनी गुड़ा के बूथ अध्यक्ष गंगा सिंह, सहायक आयुक्त, जोधपुर ओमप्रकाश पालीवाल, प्रशासक जोगाराम कुमावत, समाजसेवी मुकेश भाटी, युवा मोर्चा के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह मेड़तिया, पूर्व मण्डल अध्यक्ष मुकेश सीरवी तथा प्रशासक पूनम सिंह राजपुरोहित भी मौजूद रहे।
देवस्थान मंत्री श्री कुमावत ने सिरोही जिले के सानवाड़ा स्थित श्रीपति धाम नंदन वन पहुंचकर आयोजित संत सम्मान कार्यक्रम में पूज्य संत श्री गोविंद वल्लभदास महाराज का सम्मान किया। इस अवसर पर विधायक श्री समाराम गरासिया, भाजपा सिरोही जिला अध्यक्ष श्रीमती रक्षा भंडारी, जिला महामंत्री श्री गणपत सिंह तथा पूर्व उप जिला प्रमुख श्री नवल किशोर रावल उपस्थित रहे।
इस अवसर पर मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। संत-महात्मा समाज को सही दिशा दिखाने और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर के संरक्षण के लिए पूरी तरह संकल्पित है और यह आयोजन उसी सम्मान की भावना का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि भारत भूमि की विशेषता रही है कि यहां राजा-महाराजाओं के मुकुट भी हमेशा संतों और गुरुओं के चरणों में झुकते आए हैं। जब-जब समाज का नैतिक पतन हुआ और मानवता संकट में आई, तब-तब किसी न किसी संत या गुरु ने समाज को सही दिशा दिखाई। उन्होंने कहा कि 'गुरु वंदन कार्यक्रम' इसी महान परंपरा का जीवंत उदाहरण है। उनके अनुसार गुरु वंदन केवल एक औपचारिकता या सिर झुकाने तक सीमित नहीं है, बल्कि गुरु के बताए सत्य, करुणा, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प है। गुरु वह प्रकाश पुंज है जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का उजाला भरता है।
मंत्री श्री कुमावत ने कहा कि आज जब समाज भौतिकता की दौड़ में अपनी शांति खो रहा है, तब संतों और गुरुओं के विचार ही मानसिक शांति तथा जीवन का सही उद्देश्य सिखाते हैं। उन्होंने कहा कि संत निस्वार्थ भाव से पूरे समाज के कल्याण की कामना करते हैं और हमें यह संदेश देते हैं कि परोपकार ही सबसे बड़ा धर्म है। गुरु पूर्णिमा पर आयोजित यह सम्मान कार्यक्रम प्रदेश की सांस्कृतिक परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा और संत समाज के प्रति सरकार की सम्मान भावना का प्रतीक बनकर सामने आया।