जयपुर में राजीविका दिवाली मेले में उमड़ी भीड़, सवाई माधोपुर की ब्लैक पॉटरी बनी आकर्षण का केंद्र
जयपुर के IGPRS में आयोजित मेले में ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों के 100 से अधिक स्टॉल्स पर हस्तशिल्प और राजस्थानी व्यंजनों की भारी मांग है।
महिलाएं जयपुर के राजीविका दिवाली मेले की एक स्टॉल पर सजावटी सामान देखती दिख रही हैं।
जयपुर में आयोजित राजीविका दिवाली मेला-2026 के पांचवें दिन रविवार को खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी। इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान (IGPRS) परिसर में आयोजित इस मेले में 100 से अधिक स्टॉल्स पर ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों के हस्तशिल्प, हैंडलूम, गृह सज्जा, पारंपरिक खाद्य उत्पादों और स्थानीय वस्तुओं की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में विजिटर्स पहुंचे। दिवाली नजदीक आने के साथ सजावटी सामग्री, हस्तनिर्मित उपहारों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की मांग बढ़ गई है। मेले में खरीदारी के साथ लाइव डेमोंस्ट्रेशन, पारंपरिक कलाओं और राजस्थानी व्यंजनों के प्रति भी लोगों की विशेष रुचि देखने को मिल रही है।
राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद् (राजीविका) की ओर से आयोजित इस मेले में जयपुर की ब्लू पॉटरी के साथ सवाई माधोपुर की ब्लैक पॉटरी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अपनी विशिष्ट बनावट और पारंपरिक कारीगरी के लिए पहचानी जाने वाली ब्लैक पॉटरी से तैयार उत्पादों को विजिटर्स खूब पसंद कर रहे हैं। इस कला से जुड़े कारीगर पारंपरिक शिल्प को आधुनिक डिजाइन और उपयोगिता के अनुरूप नए रूप दे रहे हैं। लोग इन उत्पादों को देखने के साथ उनकी खरीदारी में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। ब्लैक पॉटरी का स्टॉल ग्रामीण शिल्पकारों की पारंपरिक कला को नए बाजार और ग्राहकों तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है।
मेले में दीया मेकिंग और अगरबत्ती मेकिंग के लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। आगंतुक स्वयं चाक पर मिट्टी के दीये बनाने और मशीन के माध्यम से अगरबत्ती तैयार करने की प्रक्रिया सीख रहे हैं। इसके अलावा स्टैच्यू मेकिंग और ऊन से विभिन्न उत्पाद तैयार करने की लाइव गतिविधियों को देखने के लिए भी भीड़ जुट रही है। इन गतिविधियों के माध्यम से पारंपरिक और घरेलू कौशल का प्रदर्शन किया जा रहा है। साथ ही महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने और बिक्री बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।
दिवाली के मद्देनजर मेले में दीये, कैंडल, रंगोली, तोरण और अन्य सजावटी एवं गृह सज्जा उत्पादों की खरीदारी में तेजी आई है। जूट एवं ऊन से तैयार बैग, हस्तनिर्मित जूतियां, मोजड़ी, कपड़े के खिलौने और कीचेन भी विजिटर्स को पसंद आ रहे हैं। कोटा डोरिया की साड़ियां, ब्लू पॉटरी, पारंपरिक कशीदाकारी, डोरमैट, कारपेट और अन्य हस्तनिर्मित उत्पादों की भी अच्छी मांग है। अलग-अलग स्वाद वाली कैंडी और पान माउथ फ्रेशनर्स भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। विभिन्न स्टॉल्स पर उपलब्ध उत्पादों की विविधता के कारण विजिटर्स को एक ही स्थान पर दिवाली की खरीदारी के कई विकल्प मिल रहे हैं।
खरीदारी के साथ खानपान भी मेले का प्रमुख आकर्षण बना हुआ है। विभिन्न फूड स्टॉल्स पर दाल-बाटी-चूरमा, केर-सांगरी और अन्य पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। वहीं, ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से तैयार अचार, पापड़, गट्टा मसाला और अन्य स्थानीय खाद्य उत्पादों की भी बिक्री हो रही है। मेले के माध्यम से महिला समूहों को अपने खाद्य उत्पाद ग्राहकों तक पहुंचाने और व्यवसाय को बढ़ावा देने का अवसर मिल रहा है।
राजीविका दिवाली मेला-2026 ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों के उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। यहां महिलाएं अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों के सामने प्रस्तुत कर रही हैं। इससे उन्हें खरीदारों की पसंद समझने, नए ग्राहकों से जुड़ने और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादों को बेहतर बनाने का अवसर मिल रहा है। यह आयोजन पारंपरिक हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के साथ स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी को भी बढ़ावा दे रहा है।
राजीविका दिवाली मेला-2026 का आयोजन 28 अक्टूबर से 4 नवंबर तक किया जा रहा है। मेले का समय प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से रात्रि 9 बजे तक निर्धारित है और आमजन के लिए प्रवेश निःशुल्क रखा गया है। यहां 100 से अधिक स्टॉल्स पर ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों एवं महिला उद्यमियों के हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री हो रही है। मेले में आमजन को दिवाली की खरीदारी के साथ राजस्थान की पारंपरिक कला, शिल्प और स्थानीय उत्पादों को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है। वहीं, ग्रामीण महिलाओं के हुनर को बाजार, उत्पादों को पहचान और आजीविका को नए अवसरों से जोड़ने में यह आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।