कोटा में बनेगा राजस्थान का सबसे बड़ा जिला न्यायालय परिसर, 290 करोड़ होंगे खर्च
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और मुख्य न्यायाधीश ने 290 करोड़ की लागत वाले नए आधुनिक एकीकृत जिला न्यायालय परिसर का शिलान्यास किया।
कोटा में नए जिला न्यायालय परिसर के शिलान्यास समारोह में अतिथि नजर आ रहे हैं।
कोटा में राजस्थान का सबसे बड़ा एकीकृत जिला न्यायालय परिसर बनने जा रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार अग्रवाल ने 1 नवंबर को करीब 290 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस आधुनिक परिसर एवं अधिवक्ता कक्षों का शिलान्यास किया। इस दौरान ओम बिरला ने कहा कि नया कोर्ट परिसर बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इससे भी सर्वोपरि आमजन को सरल, सुलभ, त्वरित और निष्पक्ष न्याय उपलब्ध कराना है।
बिरला ने कहा कि कोटा में प्रदेश का सबसे बड़ा और आधुनिक जिला न्यायालय परिसर विकसित किया जाएगा। लंबे समय से अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी और आम नागरिक चाहते थे कि न्यायालयों से जुड़ी सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हों। नए परिसर के निर्माण से यह आवश्यकता पूरी होगी और न्यायिक कार्यों के संचालन में भी सुविधा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि न्यायालय भवन का निर्माण अपने आप में उपलब्धि है, लेकिन न्याय व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात में है कि आम आदमी को समय पर निष्पक्ष न्याय मिले। अदालत में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान के साथ बैठने और अपनी बात रखने की सुविधा मिलनी चाहिए। इसके लिए न्यायपालिका, अधिवक्ताओं और प्रशासन को आपसी समन्वय से काम करना होगा।
नए एकीकृत जिला न्यायालय परिसर में 54 न्यायालय स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा करीब 240 अधिवक्ता चैंबर, कैंटीन, बैंक, लाइब्रेरी, बैठक कक्ष, टाइपिस्ट, फोटोकॉपी और दुकानों की सुविधाएं प्रस्तावित हैं। बिरला ने कहा कि वर्तमान में अलग-अलग स्थानों पर न्यायालय संचालित होने से न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और वादकारियों को परेशानी होती है। नए परिसर में सभी न्यायालय एक ही स्थान पर होंगे और आधुनिक तकनीक के साथ अधिवक्ताओं तथा वादकारियों के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। अधिवक्ता कक्षों के निर्माण की निविदा प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बिरला ने बताया कि न्यायालय परिसर के साथ मिनी सचिवालय विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाने की परेशानी से राहत दिलाना है। उन्होंने कहा कि कोटा में कनेक्टिविटी, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। न्यायालय परिसर और मिनी सचिवालय का विकास इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण आवश्यकता को पूरा करेगा। उन्होंने सीमित सुविधाओं के बावजूद बेहतर कार्य करने के लिए न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों के योगदान की सराहना की।
राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि नया जिला न्यायालय परिसर केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि आमजन को सरल, त्वरित और निष्पक्ष न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। न्यायालय की वास्तविक पहचान उसकी इमारत से नहीं, बल्कि वहां मिलने वाले निष्पक्ष न्याय से होती है। उन्होंने नए परिसर में महिलाओं, दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों और कमजोर वर्गों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में डिजिटल तकनीक जरूरी है, लेकिन इसे न्याय का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।
न्यायाधीश सुदेश बंसल ने कहा कि नए जिला न्यायालय परिसरों के निर्माण के साथ अधिवक्ताओं के लिए भी चैंबर और बैठने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने विधि मंत्री से आग्रह किया कि अधिवक्ताओं के लिए यह सुविधा केवल कोटा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रदेश के सभी जिलों में अधिवक्ता चैंबर बनाए जाने चाहिए। इससे अधिवक्ताओं को सुविधाएं मिलेंगी और नए न्यायालय परिसरों में कामकाज भी सुचारू रूप से संचालित हो सकेगा।
संसदीय कार्य एवं विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि नए न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं और वादकारियों को पार्किंग, लाइब्रेरी, स्वास्थ्य सुविधाओं और आधुनिक सुरक्षा सहित आवश्यक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। उन्होंने इस पहल के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और मुख्य न्यायाधीश का आभार जताया। पटेल ने बताया कि पिछले दो वर्षों में विधानसभा ने 37 महत्वपूर्ण कानून पारित किए हैं। पुराने एवं अनुपयोगी कानूनों को हटाने की प्रक्रिया भी जारी है।
शिलान्यास कार्यक्रम में जिला एवं सत्र न्यायाधीश हेमराज गौड़, स्पीकर बिरला के ओएसडी राजीव दत्ता, अभिभाषक परिषद अध्यक्ष भारत सिंह अडसेला, महासचिव शम्भू सोनी सहित अभिभाषक परिषद के बड़ी संख्या में पदाधिकारी और अधिवक्ता मौजूद रहे। करीब 290 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह परिसर कोटा की न्यायिक व्यवस्था को एक स्थान पर आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने के साथ अधिवक्ताओं और वादकारियों की लंबे समय से चली आ रही जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना है।