मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बड़ी घोषणा: गांवों में सड़क, रोजगार, शिक्षा और कृषि पर जोर
राजस्थान के गांवों में सड़क, रोजगार, शिक्षा और कृषि विकास को गति मिलेगी। अटल ज्ञान केन्द्रों, प्रगति पथ और सिंचाई कार्यों पर जोर रहेगा।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में ग्रामीण विकास को नई गति देने की दिशा में राज्य सरकार ने व्यापक कार्ययोजना पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में ग्रामीण विकास से जुड़े विभागों के अधिकारियों के साथ चर्चा करते हुए कृषि, सड़क सुदृढ़ीकरण, रोजगार, युवा कल्याण, शिक्षा, पर्यावरण, सिंचाई और सामुदायिक सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, पर्यावरण, आजीविका और सामुदायिक सुविधाओं से जुड़ा मजबूत एवं टिकाऊ आधारभूत ढांचा तैयार करना है, जिससे गांवों में जीवन की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो। उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यों का चयन स्थानीय आवश्यकता, व्यापक जनोपयोगिता और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर करने को कहा।
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए पीएमजीएसवाई के चौथे चरण के तहत करीब 3 हजार 219 किलोमीटर लंबाई की सड़कें बनाई जाएंगी। वर्ष 2026-27 में 1,500 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूरा किया जाएगा, जबकि शेष सड़कों का निर्माण आगामी वर्ष में किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि अटल प्रगति पथ योजना के तहत 5 हजार से अधिक आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्रों में सीमेंट कंक्रीट सड़कें बनाई जा रही हैं। योजना के तहत अब तक 1,681 करोड़ रुपये की लागत के कुल 764 कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 309 कार्य पूरे हो चुके हैं। उन्होंने शेष कार्यों को भी जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक निर्माण विभाग को राज्यभर में सड़क, पुल और बायपास निर्माण सहित अवसंरचना विकास के सभी कार्यों में उच्चतम गुणवत्ता बनाए रखने तथा बारिश के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों और राजकीय भवनों की शीघ्र मरम्मत के निर्देश दिए।
विकसित भारत-जी राम जी योजना के लागू होने से गांवों में रोजगार के अवसरों के साथ स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण को भी गति मिली है। मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के तहत राज्य में पिछले वर्ष की तुलना में 2.30 लाख अधिक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध करवाया जा रहा है और वर्तमान में कुल 7.22 लाख श्रमिक नियोजित हैं। श्रमिकों को दो माह में ही 215 लाख मानव दिवस सृजित किए जा चुके हैं, जिनमें महिलाओं की भागीदारी 72 प्रतिशत से अधिक रही है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले कार्यों का चयन स्थानीय आवश्यकता और जनोपयोगिता को ध्यान में रखकर करने के निर्देश दिए।
ग्रामीण युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने के अवसर देने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर खेल मैदान बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक गांवों में 9 हजार 134 खेल मैदान बनाए जा चुके हैं, जबकि 2 हजार 221 खेल मैदानों का काम भी शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। हरियाली और स्वस्थ वातावरण को बढ़ावा देने के लिए 228 करोड़ रुपये की लागत से 457 अमृत संजीवनी पार्क बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही 28 हजार 342 मॉडल तालाब एवं अमृत सरोवर के कार्य प्रगतिरत हैं। ब्लॉक स्तर पर 457 नमो नर्सरियां विकसित की जा रही हैं, जिनमें प्रत्येक नर्सरी से प्रतिवर्ष एक लाख पौधे तैयार होंगे।
ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर पौष्टिक फल-सब्जियां उपलब्ध कराने और गांवों में हरित वातावरण विकसित करने के उद्देश्य से 550 करोड़ रुपये की लागत से 11,000 से अधिक अमृत पोषण वाटिकाएं विकसित की जाएंगी। अब तक 8 हजार 501 कार्यों के लिए 237 करोड़ रुपये की स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। इन वाटिकाओं का विकास शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, उद्यानिकी तथा राजीविका के साथ कन्वर्जेन्स कर किया जाएगा। स्थानीय उत्पादों के विपणन को प्रोत्साहित करने के लिए 457 अमृत ग्रामीण हाट भी विकसित किए जाएंगे।
ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 2,000 ग्रामीण स्कूलों में क्लास रूम निर्माण पर 300 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं। ग्रामीण विद्यालयों में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण पर लगभग 81 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत राजस्थान का ऐसा मॉडल विकसित करने को कहा, जिससे गांवों का सर्वांगीण और सुनियोजित विकास सुनिश्चित हो। ग्राम पंचायत स्तर पर स्थानीय आवश्यकताओं को चिन्हित कर रोजगार सृजन के साथ ऐसी स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाए, जिनका लाभ ग्रामीणों को लंबे समय तक मिल सके। स्कूलों, अस्पतालों और अन्य आवश्यक सार्वजनिक संस्थानों तक बेहतर कनेक्टिविटी को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए।
ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सशक्तीकरण और ज्ञान संसाधनों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर चरणबद्ध रूप से अटल ज्ञान केन्द्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों में ग्रामीण युवाओं को आधुनिक लाइब्रेरी और ई-लाइब्रेरी की सुविधा मिलेगी। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ करियर मार्गदर्शन, रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण और सरकारी सेवाओं की जानकारी भी उपलब्ध होगी। अब तक 535 अटल ज्ञान केन्द्रों का निर्माण पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने शेष सभी अटल ज्ञान केन्द्रों का गुणवत्ता और शीघ्रता के साथ निर्माण कराने के निर्देश दिए।
ग्रामीण विकास के साथ कृषक कल्याण के लिए सिंचाई, ऊर्जा और संरक्षित खेती को भी लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पीएम-कुसुम योजना के तहत राज्य में अब तक 1 लाख 67 हजार 863 सौर ऊर्जा पंप संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इनसे लगभग 4.50 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि में सूक्ष्म सिंचाई अपनाकर किसानों को लाभ मिल रहा है। सूक्ष्म सिंचाई के अंतर्गत वर्ष 2025-26 तक लगभग 24.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई संयंत्र स्थापित किए गए तथा 13.27 लाख किसानों को 4 हजार 249 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया।
राज्य सरकार ने 1.43 लाख कृषि यंत्रों के लिए 373 करोड़ रुपये का अनुदान दिया है और 640 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं। इस वर्ष 50 हजार कृषि यंत्रों के लिए अनुदान दिया जाएगा। खेतों में जल उपलब्धता और सिंचाई क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से इस वर्ष 18 हजार फार्म पौण्ड और 8 हजार डिग्गियों का निर्माण किया जाएगा। फसलों को जानवरों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए 200 लाख मीटर तारबंदी के लिए किसानों को अनुदान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान सरकार में 35 हजार 893 फार्म पौण्ड और 13 हजार 522 डिग्गियों का निर्माण किया जा चुका है। साथ ही 80 लाख 57 हजार बीज मिनीकिट का वितरण किया गया है। उन्होंने कृषि विभाग को योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन की निरंतर मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) अखिल अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव सार्वजनिक निर्माण विभाग प्रवीण गुप्ता, प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं सहकारिता मंजू राजपाल, शासन सचिव ग्रामीण विकास कृष्ण कुणाल, शासन सचिव पंचायतीराज जोगाराम सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में लिए गए निर्णयों से ग्रामीण राजस्थान में सड़क, रोजगार, शिक्षा, पर्यावरण, सिंचाई और कृषि से जुड़े विकास कार्यों को चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाने पर सरकार का फोकस स्पष्ट हुआ।