राज्यसभा में उठा राजस्थान के अंतर्देशीय पोर्ट का मुद्दा, बाड़मेर परियोजना की डीपीआर आईआईटी मद्रास को

राज्यसभा में बाड़मेर-जालौर अंतर्देशीय पोर्ट परियोजना पर केंद्र का बड़ा अपडेट आया। आईआईटी मद्रास को डीपीआर का कार्य सौंपा गया, जानिए पूरी जानकारी।

Update: 2026-07-30 06:36 GMT

तस्वीर में केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल और राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ संसद भवन परिसर में बातचीत करते हुए नजर आ रहे हैं।

राजस्थान के बाड़मेर-जालौर क्षेत्र में अंतर्देशीय पोर्ट एवं कृत्रिम नहर परियोजना को लेकर तकनीकी और व्यवहार्यता संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इस परियोजना के भविष्य को लेकर केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि आवश्यक अध्ययन और रिपोर्ट तैयार करने का कार्य जारी है, जिससे पश्चिमी राजस्थान के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने राज्यसभा में देश में मौजूदा बंदरगाहों की संख्या, नए बंदरगाहों के विकास की योजना तथा राजस्थान के बाड़मेर-जालौर क्षेत्र में समुद्री जल लाकर पोर्ट विकसित करने की संभावनाओं से जुड़ा प्रश्न उठाया था। इसके उत्तर में केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने बताया कि देश में वर्तमान में 12 प्रमुख तथा 217 गैर-प्रमुख बंदरगाह संचालित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिमी तट पर वाधवन पोर्ट को ग्रीनफील्ड गहरे जल के बंदरगाह के रूप में स्वीकृति दी जा चुकी है।

मदन राठौड़ ने केंद्रीय मंत्री के जवाब का हवाला देते हुए बताया कि बाड़मेर जिले के बखासर क्षेत्र में अंतर्देशीय पोर्ट एवं कृत्रिम नहर के विकास के लिए पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की गई है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) ने आईआईटी मद्रास के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी केंद्र को गणितीय मॉडलिंग तथा राष्ट्रीय जलमार्ग-48 (जवाई-लूणी नदी एवं कच्छ का रण) के लिए प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का कार्य सौंपा है।

उन्होंने बताया कि अध्ययन में भवात्रा से कांडला क्रीक तक का मार्ग अधिक उपयुक्त पाया गया है, जबकि अन्य विकल्पों को भी व्यवहार्य माना गया है। इसी आधार पर यातायात अध्ययन रिपोर्ट को अद्यतन करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

मदन राठौड़ ने कहा कि केंद्रीय मंत्री का यह जवाब पश्चिमी राजस्थान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, परियोजना के आगे बढ़ने से बाड़मेर, जालौर सहित सीमावर्ती क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश, व्यापार, परिवहन, रोजगार और आधारभूत ढांचे के विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह पहल राजस्थान को देश के समुद्री व्यापार तंत्र से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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