गुरु पूर्णिमा पर बाबा उमाकान्त जी महाराज का संदेश, सच्चे गुरु की बताई पहचान

बाबा उमाकान्त जी महाराज ने गुरु पूर्णिमा पर सच्चे गुरु की पहचान बताई, विदेशों से पहुंचे श्रद्धालुओं और विशाल आयोजन व्यवस्था की जानकारी।

Update: 2026-07-30 06:54 GMT

तस्वीर में परम पूज्य परम सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ठिकरिया, जयपुर में मंच पर बैठे हुए नजर आ रहे हैं।

ठिकरिया, जयपुर, राजस्थान में 30.07.2026 को गुरु पूर्णिमा पर्व के अवसर पर परम पूज्य परम सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने सतसंग में सच्चे गुरु की पहचान और आध्यात्मिक गुरु की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाहरी आंखें बंद करने पर अंधेरा हो जाता है, लेकिन जो अंधेरे में उजाला प्रकट कर दे, वही सच्चे गुरु होते हैं।

बाबा उमाकान्त जी महाराज ने बताया कि गुरु दो प्रकार के होते हैं—विद्या गुरु और आध्यात्मिक गुरु। विद्या गुरु खेती, दुकानदारी, नौकरी, पढ़ाई-लिखाई सहित सांसारिक कार्यों की शिक्षा देते हैं। वहीं आध्यात्मिक गुरु जीवात्मा, जो परमात्मा का अंश है, उसे परमात्मा तक पहुंचाने का उपाय बताते हैं।

उन्होंने कहा कि राम भगवान और कृष्ण भगवान ने भी दोनों प्रकार के गुरु किए थे। राम भगवान के विद्या गुरु विश्वामित्र जी और आध्यात्मिक गुरु वशिष्ठ जी थे। इसी प्रकार कृष्ण भगवान के विद्या गुरु संदीपनी जी और आध्यात्मिक गुरु सुपच जी थे।

सतसंग में उन्होंने कहा कि मुक्ति-मोक्ष का उपाय बताने वाले इसी धरती पर रहते हैं और वे महात्मा, सन्त, सतगुरु कहलाते हैं। वही समर्थ गुरु, सच्चे गुरु, स्प्रिचुअल मास्टर व मुर्शिद ए कामिल कहलाते हैं। लोगों ने ऐसे गुरुओं के अलग-अलग नाम रखे हैं। ऐसे गुरु आध्यात्मिक ज्ञान कराते हैं, अध्यात्म की पहचान कराते हैं और सत्य यानी उस प्रभु से मिलवाते हैं।

बाबा उमाकान्त जी महाराज ने गुरु के विभिन्न स्वरूपों का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु कई प्रकार के होते हैं, लेकिन गुरु में भी भेद होता है। उन्होंने कहा कि जो शब्द भेदी होते हैं, जो शब्द यानी प्रभु की आवाज का भेद बताते हैं और सुरत यानी जीवात्मा को शब्द के साथ जोड़ते हैं, वे समर्थ गुरु होते हैं। जब वे शब्द का भेद बताते हैं, तभी जीवात्मा परमात्मा तक पहुंच पाती है।

उन्होंने बताया कि शब्द भेदी गुरु को कंज गुरु भी कहा गया है। कंज गुरु के लिए कहा गया है, "देह गुरु से कुछ ना पाया, कंज गुरु ने राह बताया"। कंज गुरु उस प्रभु से मिलने की राह बताते हैं और जीव को अंधेरे से उजाले में ले जाते हैं।

सतसंग में कहा गया, "'रु' है नाम प्रकाश का 'गु' कहिये अंधकार, ताको करे विनाश जो सोई गुरु करतार"। बाबा उमाकान्त जी महाराज ने कहा कि जब बाहरी आंखों को बंद किया जाता है तो अंधेरा दिखाई देता है, लेकिन जो उस अंधेरे में उजाला प्रकट कर दे, वही सच्चे गुरु होते हैं।

इस अवसर पर गुरु पूर्णिमा पर्व पर गुरु के दर्शन करने के लिए रसिया (रूस), मॉरीशस, US, दुबई, कतर, सिंगापुर, हांगकांग, UK, कैनेडा, स्पेन, साउथ अफ्रीका, घाना (नाइजीरिया) इत्यादि देशों से श्रद्धालु सात समुन्दर पार पहुंचे।

आयोजन व्यवस्था से जुड़े संगत के सेवादारों ने देश-विदेश से आने वाले भक्तों के लिए विभिन्न विभागों की व्यवस्थाएं तैयार कीं। भोजन व्यवस्था के लिए 50 से ज्यादा भोजन भंडारे संचालित किए गए, जिनमें राजस्थान के 20 भण्डारे और अन्य राज्यों जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड आदि के भण्डारे शामिल रहे। गर्मी को देखते हुए पीने के पानी के लिए 100 से ज्यादा पानी के टैंकरों की व्यवस्था की गई, जिससे आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

गुरु पूर्णिमा पर्व पर आयोजित इस सतसंग में बाबा उमाकान्त जी महाराज ने आध्यात्मिक गुरु के महत्व और जीवात्मा को परमात्मा तक पहुंचाने वाले मार्ग की जानकारी दी, वहीं देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं और सेवाओं की व्यापक व्यवस्था भी आयोजन का प्रमुख हिस्सा रही।

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