नोहर के जोगीआसन में बाबा अमरनाथ की पुण्यतिथि पर भंडारा, संतों ने की पूजा
नाथ संप्रदाय के राम पंथ की प्रमुख गद्दी जोगीआसन में सिद्ध बाबा अमरनाथ की पुण्यतिथि पर महाप्रसाद वितरण हुआ, जहां राजस्थान-हरियाणा से श्रद्धालु पहुंचे।
तस्वीर में नोहर आश्रम परिसर के भीतर बैठे भगवा वस्त्रधारी साधु-संत नजर आ रहे हैं।
नोहर 7 अक्टूबर। जोगीआसन स्थित सिद्ध बाबा अमरनाथ के प्राचीन समाधि मंदिर में बुधवार को बाबा अमरनाथ महाराज की पुण्यतिथि श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। पुण्यतिथि के अवसर पर क्षेत्र की धर्मप्रेमी जनता के सहयोग से भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें राजस्थान, हरियाणा और पंजाब सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और साधु-संत पहुंचे।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल मंगला आरती से हुई। इसके बाद बाबा अमरनाथ डेरे के महंत रविनाथ ने मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधानपूर्वक समाधि पूजन कराया। समाधियों पर भोग-प्रसाद, वस्त्र एवं शॉल अर्पित किए गए। इस दौरान भारतमाता आश्रम के महंत रामनाथ अवधूत, पुजारी शंकरनाथ सहित बड़ी संख्या में साधु-संत एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।
10वीं शताब्दी से जुड़ा है आश्रम का इतिहास
महंत रामनाथ अवधूत ने बताया कि जोगियासन स्थित यह प्राचीन स्थान नाथ संप्रदाय के राम पंथ की प्रमुख गद्दी माना जाता है। मान्यता के अनुसार 10वीं शताब्दी में सर्वप्रथम योगी बालनाथ जी महाराज ने यहां जाल वृक्ष के नीचे धूना स्थापित किया था, जो आज भी अखंड रूप से प्रज्ज्वलित है।
उन्होंने बताया कि योगी बालनाथ की चौथी पीढ़ी में बाबा अमरनाथ जी महाराज हुए, जो सिद्ध एवं चमत्कारी नाथ संत के रूप में प्रसिद्ध थे। बाबा अमरनाथ जी ने नोहर के अलावा कई वर्षों तक हनुमानगढ़ क्षेत्र में भी तपस्या की। भटनेर दुर्ग के निर्माण में भी बाबा जी द्वारा कई बार आर्थिक सहयोग किए जाने की मान्यता है।
जीवित समाधि लेने की मान्यता
महंत रामनाथ अवधूत ने बताया कि बाबा अमरनाथ जी ने नोहर स्थित इसी पवित्र स्थल पर जीवित समाधि ली थी। आज भी क्षेत्र में धार्मिक जागरण, सत्संग और रातीजोगा के दौरान बाबा अमरनाथ जी को भजनों के माध्यम से श्रद्धापूर्वक याद किया जाता है।
आश्रम परिसर में नाथ संप्रदाय के सैकड़ों सिद्ध संतों की समाधियां भी विद्यमान हैं, जो इस स्थान की प्राचीन धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपरा की गवाही देती हैं। पुण्यतिथि के अवसर पर दिनभर श्रद्धालुओं ने समाधि स्थल पर दर्शन किए और भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।