सोमवती अमावस्या के अवसर पर पीपल के पेड़ की पूजा करती महिलाओं और भगवान विष्णु, लक्ष्मी जी व शिवजी को दर्शाती एक प्रतीकात्मक तस्वीर|

हिंदू धर्म की परंपराओं में कार्तिक महीने का एक बहुत ही विशेष और पवित्र स्थान माना जाता है। कहते हैं कि यह पूरा महीना भक्ति और आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी दौरान भगवान विष्णु एक लंबी निद्रा के बाद जागते हैं। इस पवित्र महीने की महत्ता और भी बढ़ जाती है जब इसकी अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को 'सोमवती अमावस्या' कहा जाता है, जो धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत फलदायी मानी गई है। वर्ष 2026 में कार्तिक मास की यह अमावस्या न केवल सोमवती अमावस्या है, बल्कि यह उस साल की अंतिम अमावस्या भी होगी। इस विशेष दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान-पुण्य करने और विधि-विधान से पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि ऐसा करने से जातक को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की असीम अनुकंपा के साथ-साथ भगवान शिव का भी विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है, क्योंकि सोमवार का दिन महादेव को समर्पित होता है|

चूँकि यह साल की आखिरी सोमवती अमावस्या है, इसलिए कई लोग इस असमंजस में हो सकते हैं कि स्नान, दान और पूजा आदि के लिए सही तारीख क्या है और शुभ मुहूर्त कब है। ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर आइए, पं. राकेश झा से विस्तार से जानते हैं कि सोमवती अमावस्या की तिथि कब शुरू और समाप्त होगी, और इस दिन के लिए उत्तम शुभ मुहूर्त क्या हैं।

सोमवती अमावस्या 2026 की सही तारीख और समय

पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का प्रारंभ 8 नवंबर, दिन रविवार को सुबह 11 बजकर 29 मिनट पर होगा। यह तिथि अगले दिन, यानी 9 नवंबर, सोमवार को दोपहर में 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी। शास्त्रों में उदया तिथि का विशेष महत्व बताया गया है, जिसके अनुसार जिस तिथि में सूर्योदय होता है, उसी दिन उस तिथि से संबंधित धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। चूँकि 9 नवंबर की सुबह सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि व्याप्त रहेगी, इसलिए सोमवती अमावस्या का व्रत, पवित्र स्नान, दान और पूजन आदि कार्य 9 नवंबर को ही करना शास्त्र सम्मत होगा। सोमवार के दिन पड़ने के कारण ही यह 'सोमवती अमावस्या' कह लाएगी|

इस अमावस्या पर लक्ष्मीनारायण के साथ मिलेगी शिवजी की भी कृपा

पंडित राकेश झा बताते हैं कि कार्तिक मास शास्त्रों में बहुत पवित्र माना गया है, और इसी माह से कई शुभ और मांगलिक कार्यों की भी शुरुआत हो जाती है। इस बार कार्तिक अमावस्या पर सोमवार का उत्तम संयोग बन रहा है, जिसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यह योग धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। कहते हैं कि साल की इस अंतिम सोमवती अमावस्या पर जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजन करता है, उसे विशेष फल की प्राप्ति हो सकती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान शिव की भी कृपा सहज ही प्राप्त हो जाती है, क्योंकि सोमवार का दिन महादेव को समर्पित है। इस दिन हरिद्वार, प्रयागराज जैसी प्राचीन और पवित्र नदियों में स्नान करने और दान देने का बहुत ही गहरा और विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है|

स्नान-दान के लिए सोमवती अमावस्या 2026 के शुभ चौघड़िया मुहूर्त

यदि आप 9 नवंबर, सोमवार को सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर पवित्र स्नान, दान और विशेष पूजा-अर्चना करने की योजना बना रहे हैं, तो इसके लिए पंडित जी द्वारा बताए गए शुभ चौघड़िया मुहूर्त का ध्यान रखना उत्तम रहेगा|

  • सूर्योदय का समय : सुबह 6 बजकर 38 मिनट पर
  • अमृत चौघड़िया : सुबह 6 बजकर 38 मिनट से लेकर 8 बजे तक
  • शुभ चौघड़िया : सुबह 9 बजकर 21 मिनट से लेकर 10 बजकर 43 मिनट तक|

इन विशिष्ट और शुभ समय अवधियों में किए गए कार्यों को आध्यात्मिक रूप से अधिक फलदायी माना जाता है।