धनतेरस के दिन मुख्य द्वार पर जरूर बनाएं ये 5 शुभ चिह्न होगा माता लक्ष्मी का वास, जानें इन्हें बनाने की सही विधि|
धनतेरस के दिन घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक, कलश और शुभ-लाभ जैसे 5 शुभ चिह्न विधिपूर्वक बनाने से घर में सकारात्मकता और समृद्धि आती है।
धनतेरस के पावन अवसर पर मुख्य द्वार की सजावट के लिए बनाए गए शुभ चिह्न और प्रतीक दिखाई दे रहे हैं।
धनतेरस के पावन पर्व के साथ ही पांच दिवसीय दीवाली के महापर्व की शुरुआत हो जाती है। इस अवसर पर लोग अपने घरों की साफ-सफाई और सजावट बहुत ही खूबसूरती से करते हैं। इस दौरान घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर विशेष ध्यान दिया जाता है, क्योंकि मान्यता है कि मुख्य द्वार से ही माता लक्ष्मी का आगमन होता है। घर के मेन दरवाजे को सुंदर और मांगलिक बनाने के लिए कई तरह की सजावट की जाती है, साथ ही कुछ ऐसे शुभ चिह्न भी बनाए जाते हैं जिन्हें हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और मंगलकारी माना गया है।
ज्योतिष एक्सपर्ट पिनाकी मिश्रा के अनुसार, धनतेरस के दिन मुख्य द्वार पर स्वास्तिक, कलश और अन्य शुभ चिह्न विधिपूर्वक बनाने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास बना रहता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि धनतेरस के दिन प्रवेश द्वार पर कौन-कौन से 5 शुभ चिह्न बनाने चाहिए और उन्हें बनाने की सही विधि क्या है।
1. स्वास्तिक का चिह्न
हिंदू धर्म में स्वास्तिक को मंगल, कल्याण और शुभता का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। आप धनतेरस के शुभ अवसर पर अपने घर के प्रवेश द्वार के दोनों तरफ स्वास्तिक का चिह्न बना सकते हैं। इसके अलावा, मुख्य द्वार के ऊपर मध्य में भी स्वास्तिक बनाया जा सकता है। इसे बनाने के लिए रोली, हल्दी, कुमकुम या सिंदूर का प्रयोग करना बेहद शुभ माना जाता है।
• स्वास्तिक बनाने की विधि: स्वास्तिक बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि सबसे पहले चार सीधी भुजाएं बनाई जाएं। इसके बाद, हर भुजा को समकोण पर मोड़ा जाता है और चारों कोनों पर छोटे-छोटे बिंदु भी लगाए जाते हैं। स्वास्तिक निर्माण के पश्चात उस पर अक्षत (चावल) और पुष्प अर्पित करें तथा मन में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी का स्मरण करें। मान्यता है कि यह चिह्न घर में सुख-समृद्धि, मंगल और सकारात्मकता के स्वागत का संदेश देता है।
2. ओम (ॐ) का चिह्न
हिंदू धर्म में 'ओम' को परम पवित्र ध्वनि और ब्रह्म का प्रत्यक्ष प्रतीक माना गया है। धनतेरस के दिन आप अपने मुख्य द्वार के ऊपर या पूजा घर के प्रवेश द्वार के पास 'ॐ' का चिह्न अंकित कर सकते हैं। इस चिह्न को बनाने के लिए भी रोली, हल्दी या कुमकुम का उपयोग करना बहुत फलदायी होता है।
• ओम बनाने की विधि: इस चिह्न को बनाने के लिए सबसे पहले इसकी मुख्य घुमावदार आकृति को बनाएं। इसके बाद, इसके ऊपर अर्धचंद्र और बिंदु का निर्माण करें। इसे बनाते समय अपने मन में भगवान गणेश, शिवजी और अपने इष्टदेव का ध्यान रखना चाहिए। माना जाता है कि प्रवेश द्वार पर ॐ का चिह्न होने से घर के अंदर का वातावरण शांत और पूरी तरह सकारात्मक बना रहता है।
3. माता लक्ष्मी के चरण चिह्न
धनतेरस और दीवाली के खास मौकों पर घर में माता लक्ष्मी के चरण चिह्न बनाना अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। कई लोग रंगोली के माध्यम से भी माता के चरण बनाते हैं। इन चरण चिह्नों को हमेशा मुख्य द्वार से घर के अंदर की तरफ आते हुए बनाना चाहिए। यह इस बात का सुंदर प्रतीक होता है कि माता लक्ष्मी आपके घर में प्रवेश कर रही हैं।
• चरण चिह्न बनाने की विधि: इसे बनाने के लिए आप चावल के आटे के घोल, रोली या कुमकुम का इस्तेमाल कर सकते हैं। दोनों पैरों के निशान साफ और करीने से छोटे आकार में बनाएं और इनकी दिशा हमेशा घर के भीतर की ओर ही रखें। इन चरण चिह्नों को मुख्य द्वार से लेकर मंदिर या लक्ष्मी पूजन की चौकी की दिशा तक बनाया जा सकता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में धन-धान्य, सौभाग्य और स्थायी समृद्धि का आगमन होता है।
4. शुभ-लाभ का चिह्न
ज्योतिष एक्सपर्ट पिनाकी मिश्रा बताते हैं कि शुभ-लाभ के चिह्न को भगवान गणेश से जुड़ी मंगल कामना तथा असीम समृद्धि के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। आप अपने मुख्य द्वार के दोनों तरफ स्वास्तिक के साथ-साथ 'शुभ-लाभ' भी लिख सकते हैं। इन्हें भी रोली, कुमकुम या हल्दी से बनाना बहुत शुभ होता है, और इसके साथ ही एक छोटे दीपक का चिह्न भी बनाया जा सकता है। प्रवेश द्वार पर शुभ-लाभ लिखने के साथ-साथ घर में अच्छे कार्यों की वृद्धि और आर्थिक उन्नति की विशेष कामना की जाती है।
5. कलश का चिह्न
मुख्य द्वार के पास कलश का चिह्न बनाना भी बेहद मंगलकारी माना जाता है। हिंदू संस्कृति में कलश को पूर्णता, अपार समृद्धि, पवित्रता और सभी शुभ कार्यों का प्रतीक माना गया है। धनतेरस के पावन दिन आप मुख्य द्वार के पास कलश का सुंदर चित्र बना सकते हैं।
• कलश बनाने की विधि: कलश का निर्माण करने के लिए सबसे पहले उसका निचला आधार और गोलाकार पात्र बना लें। इसके बाद, कलश के ऊपर नारियल और आम के पत्तों की आकृति उकेरें। इसे आप हल्दी, कुमकुम या रंगबेरंगी रंगोली के रंगों से सजा सकते हैं। मान्यता है कि कलश घर में सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों की शुरुआत और समृद्धि के स्वागत का मुख्य प्रतीक होता है।