पूजा स्थल पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की मूर्ति तथा राशि चक्र का प्रतीक दिख रहा है।

धनतेरस 2026 पर ग्रहों की विशेष युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष के अनुसार, यह शुभ संयोग तीन राशियों के जातकों के लिए आर्थिक उन्नति, करियर में सफलता और सुख-समृद्धि के नए अवसर लेकर आ सकता है। इस योग के प्रभाव से इन राशियों को धन लाभ होने के साथ नौकरी और व्यापार में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है।

इस वर्ष 6 नवंबर 2026 को धनतेरस का त्योहार मनाया जाएगा। ज्योतिषियों के अनुसार, धनतेरस के आसपास बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को धन, वैभव, सुख-समृद्धि और मान-सम्मान का कारक माना जाता है। जब सौंदर्य, धन और भौतिक सुखों के कारक शुक्र तथा बुद्धि, व्यापार और वाणी के कारक बुध एक ही राशि में स्थित होते हैं, तब लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण होता है। धनतेरस के दिन बनने वाला यह शुभ संयोग मेष, तुला और धनु राशि के जातकों के लिए विशेष लाभकारी माना जा रहा है।

मेष राशि के जातकों के लिए धनतेरस पर बनने वाला लक्ष्मी नारायण राजयोग शुभ परिणाम लेकर आ सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के योग हैं और करियर में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों की आय में वृद्धि होने के साथ नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। वहीं, जो लोग नया व्यापार शुरू करने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए भी यह समय अनुकूल रह सकता है।

तुला राशि के जातकों के लिए यह राजयोग आय के नए स्रोत खोल सकता है। लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने और पुराने कर्ज से मुक्ति मिलने की संभावना है। कार्यस्थल पर आपके काम की सराहना हो सकती है और प्रमोशन के योग बन रहे हैं। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। मां लक्ष्मी की कृपा से भौतिक सुख-सुविधाओं में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

धनु राशि के जातकों के लिए लक्ष्मी नारायण राजयोग भौतिक सुख और वैभव लेकर आ सकता है। पैतृक संपत्ति से धन लाभ होने के योग हैं। इस दौरान निवेश से भी फायदा मिल सकता है। लंबे समय से रुके हुए कार्य बिना किसी बाधा के जल्द पूरे होने की संभावना है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छा ऑफर मिल सकता है। धनतेरस के शुभ अवसर पर वाहन या नया घर खरीदने का सपना भी पूरा हो सकता है।

धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष उपाय करने की भी मान्यता है। इस दिन शाम को मंदिर या पूजा स्थल पर घी का चौमुखी दीपक जलाना चाहिए। मां लक्ष्मी को गुलाबी या लाल कमल का फूल अर्पित करना चाहिए। फूल चढ़ाते समय 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:' मंत्र का जाप करना चाहिए।

इसके अलावा, धनतेरस पर घर के अलग-अलग कोनों और पवित्र स्थानों पर 13 दीपक जलाने चाहिए। इस दिन माता लक्ष्मी, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि की विधि-विधान से पूजा करने का भी महत्व बताया गया है। धनतेरस पर बनने वाला लक्ष्मी नारायण राजयोग और पूजा के ये उपाय इस पर्व को ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष बना रहे हैं।