धनतेरस के पावन अवसर पर माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा के लिए तैयार की जा रही धन की पोटली का प्रतीकात्मक दृश्य।   

धनतेरस के पावन अवसर पर सनातन परंपरा में धन की पोटली बनाने का विशेष विधान और महत्व रहा है। इस दिन माता लक्ष्मी और धन के देवता भगवान कुबेर को प्रसन्न करने के लिए पूरी विधि-विधान के साथ धन की पोटली (कुबेर पोटली) तैयार की जाती है। पंडित राकेश झा के अनुसार, धनतेरस के दिन इस पोटली को बनाकर घर में रखने से सुख-समृद्धि और खुशहाली का वास होता है, और पूरे वर्ष घर में कभी भी धन-धान्य की कोई कमी नहीं रहती। आइए जानते हैं इसे बनाने की सही सामग्री और विधि।

धन पोटली बनाने के लिए आवश्यक सामग्री

धन की पोटली को तैयार करने के लिए कुछ खास और पवित्र चीजों को शामिल किया जाता है। इसके लिए आपको निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होगी:

  • लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा
  • पोटली को बांधने के लिए पवित्र कलावा
  • 7 गोमती चक्र और 7 पीली कौड़ी
  • 7 हल्दी की गांठ और 7 सुपारी
  • 7 लौंग और 7 हरी इलायची
  • थोड़ा सा साबुत धनिया और थोड़े से अक्षत (चावल)
  • चांदी का सिक्का (यदि चांदी का न हो तो तांबे, पीतल या सोने का सिक्का भी रख सकते हैं)
  • कपूर की 2 गोलियां

धन की पोटली बनाने की संपूर्ण विधि

धनतेरस के दिन शाम के समय पूजा के दौरान इस पोटली को बेहद सरल चरणों में तैयार किया जा सकता है:

  • सामग्री एकत्र करना: सबसे पहले एक लाल या पीले रंग के कपड़े पर सारी सामग्री को सुरक्षित रख लें। शाम की पूजा के वक्त इस पोटली में सारा सामान भरकर खुला ही छोड़ दें।
  • मंत्रों का जाप: इसके बाद दीपक प्रज्वलित करें और माता लक्ष्मी के विशेष मंत्र "ओम श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का कम से कम 108 बार जाप करें। इसके पश्चात भगवान कुबेर के प्राप्ति मंत्र "ओम श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः" का भी कम से कम 108 बार जाप करें।
  • रात्रि भर रखने का नियम: पूजा के बाद मंदिर में जल रहे दीपक में पर्याप्त घी बढ़ा दें ताकि वह पूरी रात जलता रहे। धन की इस पोटली को रात भर मंदिर में खुला ही रखा रहने दें|
  • तिजोरी में स्थापना: अगले दिन यानी छोटी दिवाली या दीपावली की सुबह जल्दी स्नान करने के बाद, इस पोटली को कलावे (मौूली) से अच्छी तरह बांध लें और अपने घर की तिजोरी या उस स्थान पर रख दें जहां आप अपना धन और आभूषण संभाल कर रखते हैं।