अयोध्या के सरयू घाट पर दीपोत्सव के दौरान विक्रेताओं से रामयंत्र खरीदते पर्यटक और श्रद्धालु।

डिजिटल डेस्क, अयोध्या। सरयू के घाटों पर दीपों की रोशनी और रामनाम की गूंज के बीच रामयंत्र की धुन श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर खींच रही है। गले में रामयंत्र टांगकर दोनों हाथों से उसकी ताल बजाते विक्रेता दीपोत्सव के दौरान घाटों पर आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। रामभक्ति के गीतों के साथ गूंजती इसकी धुन सुनकर देशी ही नहीं, विदेशी पर्यटक भी ठहरने को मजबूर हो रहे हैं। कोई इसकी मधुर धुन सुन रहा है तो कोई रामभक्ति से जुड़ी इस निशानी को अपने साथ ले जाने के लिए खरीद रहा है। एक जोड़ा रामयंत्र 50 रुपये में बेच रहे इन विक्रेताओं के लिए यह धार्मिक आस्था के साथ आजीविका का भी माध्यम बन गया है।

गोरखपुर निवासी सचींद्रनाथ सरयू घाट पर रामयंत्र बेचकर अपनी आजीविका चला रहे हैं। वह एक जोड़ा रामयंत्र 50 रुपये में देते हैं। आम दिनों में उनकी रोजाना कमाई 800 से 1000 रुपये तक रहती है, लेकिन दीपोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के साथ उनकी आय भी बढ़कर 1800 से 2500 रुपये तक पहुंच रही है। सचींद्रनाथ के लिए रामयंत्र बेचना महज कारोबार नहीं, बल्कि रामभक्ति से जुड़े रहने का माध्यम भी है।

सचींद्रनाथ बताते हैं कि वह रामयंत्र बेचने के साथ रामभक्ति के गीत भी गाते हैं। इसकी धुन सुनकर श्रद्धालु रुकते हैं और रामयंत्र खरीदकर अपने साथ ले जाते हैं। दीपोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से बिक्री और कमाई दोनों में इजाफा होता है। इस तरह रामयंत्र श्रद्धालुओं के लिए आस्था की स्मृति बनता है, जबकि विक्रेताओं के लिए घर-परिवार चलाने का सहारा साबित हो रहा है।

बिहार निवासी राजेंद्र महतुर की कहानी भी रामयंत्र के कारोबार से जुड़ी इसी तस्वीर को सामने लाती है। वह पिछले तीन वर्षों से रामयंत्र बेच रहे हैं। आम दिनों में उनकी रोजाना कमाई करीब 800 रुपये तक होती है, लेकिन दीपोत्सव के दौरान यह बढ़कर 2000 रुपये तक पहुंच गई है। राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ी आवाजाही ने उनके कारोबार को नई गति दी है।

राजेंद्र महतुर कहते हैं, ‘राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में लोगों का आना बढ़ा है। रामयंत्र की धुन सुनकर लोग रुकते हैं और खरीदते हैं। इससे हमारा रोजगार भी अच्छा चल रहा है और रामभक्ति से जुड़े रहने का अवसर भी मिलता है।’ पहले दूसरे काम में लगे राजेंद्र अब रामयंत्र बेचकर अपनी आजीविका चला रहे हैं।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित हो रही रामनगरी ने धार्मिक पर्यटन के साथ छोटे कारोबारियों के लिए भी रोजगार के नए अवसर खोले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रामनगरी के विकास तथा दीपोत्सव जैसे आयोजनों के चलते श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही का असर सरयू घाटों पर छोटे विक्रेताओं के कारोबार और कमाई में भी दिखाई दे रहा है।

सरयू घाटों पर रामयंत्र की गूंज अब केवल रामभक्ति के माहौल तक सीमित नहीं है। इसकी धुन श्रद्धालुओं को आस्था और परंपरा से जोड़ने के साथ छोटे विक्रेताओं की आजीविका का आधार भी बन रही है। श्रद्धालु रामभक्ति की स्मृति लेकर लौट रहे हैं, तो विक्रेताओं को दीपोत्सव के दौरान बढ़ती भीड़ से रोजगार और कमाई का सहारा मिल रहा है।