तस्वीर में डीग में श्री लोहागढ़ साहित्य एवं समाज सेवा समिति द्वारा आयोजित दीपावली मिलन समारोह और काव्य गोष्ठी के दौरान सम्मानित अतिथि नजर आ रहे हैं।

डीग, 5 नवंबर। दीपावली के अवसर पर श्री लोहागढ़ साहित्य एवं समाज सेवा समिति की ओर से सामाजिक सरोकार और साहित्यिक गतिविधियों को जोड़ते हुए लगभग 150 परिवारों को मिठाई वितरित की गई। इस अवसर पर जिला ब्राह्मण समाज के जिला अध्यक्ष एवं समाजसेवी मोहन स्वरूप पाराशर के सानिध्य में काव्य गोष्ठी का आयोजन भी किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर परिषद के उपसभापति प्रदीप शर्मा उर्फ बंटू रहे, जबकि अध्यक्षता राजकीय कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. वीरेंद्र सिंह ने की। विशिष्ट अतिथियों में उमेश पाराशर, मोहन बंसी वाले, समाजसेवी सुनील बंसल, जालम सिंह कोटा एवं सूरज बेनीवाल शामिल रहे।

कवि गोष्ठी का शुभारंभ समिति के संस्थापक अध्यक्ष कवि चंद्रभान चंद्र ने सरस्वती वंदना के साथ किया। इसके बाद कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक बदलाव, पारिवारिक रिश्तों, राजनीति, पुलिस प्रशासन और वर्तमान मानवीय परिस्थितियों को प्रस्तुत किया।

श्रुति कुसुमाकर ने 'नया दौर आएगा, यह मोबाइल बचपन खाएगा, नया दौर आएगा' कविता के माध्यम से आधुनिक पीढ़ी में हो रहे बदलावों को रेखांकित किया। तेजस्व सिंह ने 'अंधों को दर्पण क्या देना, बहरों को भजन सुनना क्या। जो रक्त पान करते उनको गंगा का नीर पिलाना क्या।।' पंक्तियां सुनाकर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।

धर्मेश चाहर ने 'राजनीति के उल्का पिंडों की जय हो। पुलिस प्रशासन उनके डंडों की जय हो।' कविता के माध्यम से आधुनिक पुलिस प्रशासन पर व्यंग्य किया। वहीं, जगत पाराशर ने 'जो कोशिश एक हल्की सी हृदय से पार हो जाए। शिला चाहो तो इस्पाती पिघल के तार हो जाए।' रचना सुनाकर तालियां बटोरीं।

वैष्णवी कुसुमाकर ने 'बहन को ना भैया कोई, मैया को ना बेटा कोई, ससुराल जाए खूब हुकुम बजायौ है।' कविता के जरिए पारिवारिक रिश्तों में आए बदलावों को उजागर किया। मंगतू राम शर्मा ने 'कौन बताओ मोकूं कौन बतावै, सुत पित मात और दारा कोई तेरे काम ना आवे।।' रचना प्रस्तुत कर जीवन में रिश्तों की भूमिका को बताया।

संस्था के अध्यक्ष कवि चंद्रभान वर्मा चंद्र ने 'अभिमन्यु को चक्रव्यूह से बाहर कौन निकलेगा' कविता के माध्यम से वर्तमान मानव की कशमकश भरी स्थिति का वर्णन किया।

कार्यक्रम में कैप्टन कल्लू सिंह, भगवान शरण गुप्ता, युवराज फौजदार, विष्णु कुमार, मुरारी लाल सैनी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। दीपावली पर मिठाई वितरण के साथ आयोजित इस काव्य गोष्ठी में सामाजिक सरोकारों और समकालीन विषयों को कविताओं के माध्यम से अभिव्यक्ति दी गई।

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