तस्वीर में ठाणे के तेरापंथ भवन में आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित कलाकार और संत नजर आ रहे हैं。

युगप्रधान आचार्य महाश्रमण के सुशिष्य मुनि कुलदीप कुमार एवं मुनि मुकुल कुमार के सानिध्य में तेरस की रात ठाणे का तेरापंथ भवन भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। भिक्षु भक्तों का ऐसा सैलाब उमड़ा कि उपस्थित श्रद्धालुओं को लगा मानो वे स्वयं सिरियारी में बैठकर भक्ति में लीन हों। इस दौरान ‘जय भिक्षु’ के जयघोष और भक्ति गीतों से पूरा भवन गूंज उठा।

मुनि मुकुल कुमार की पारखी नजर से चयनित गायकों ने भक्ति संध्या में ऐसा समां बांधा कि श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए। गायक पार्थ दुग्गड़ ने जैसे ही ‘तेरापंथ रो भाग्य विधाता...’ गीत की शुरुआत की, लोग भक्ति में झूम उठे।

इसके बाद 13 वर्ष की जीविका साबद्रा ने ‘बाबा तेरा क्या फर्ज नहीं...’ गीत प्रस्तुत किया। गीत के दौरान ‘ओम् अर्हं’ की ध्वनि से पूरा भवन गूंज उठा। नेहल कोठारी के ‘तेरस री है रात...’ गीत ने श्रद्धालुओं को मानो सिरियारी के साक्षात दर्शन करा दिए।


 


लविशा और मीना दुग्गड़ की जुगलबंदी हो या धीरज बोहरा का ‘इक्षु रस के जैसा भिक्षु नाम...’ गीत, हर प्रस्तुति ने भिक्षु बाबा की भक्ति में डूबे श्रद्धालुओं की श्रद्धा और विश्वास को नई ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान मुनि मुकुल कुमार ने कहा, “जब हमारे अपने ही घर में ऐसी प्रतिभाएं छिपी हुई हैं तो बाहर क्यों खोजें?”

मुनि मुकुल कुमार के अथक परिश्रम से ठाणे में आयोजित यह भक्ति संध्या समाज के लिए यादगार बन गई। कार्यक्रम में प्रस्तुत भक्ति गीतों और कलाकारों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को देर तक भक्ति के माहौल में बांधे रखा।


 


इस कार्यक्रम को सफल बनाने में तेरापंथी सभा ठाणे, ठाणे की पांचों युवक परिषदें, महिला मंडल, टीपीएफ, अणुव्रत समिति ठाणे, सभी संघीय संस्थाएं ठाणे एवं सहयोगी क्षेत्रों का बहुत-बहुत सहयोग प्राप्त हुआ।

ठाणे सभा अध्यक्ष नरेश बाफना, मंत्री राजू बापना, कोषाध्यक्ष नवरतन गोखरु और उनकी टीम से पंकज नौलखा तथा देवेंद्र पूनमिया ने सभी गायकों का विशेष सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन रमीला बड़ाला ने किया। इस प्रकार तेरस की यह भक्ति संध्या ठाणे के तेरापंथ भवन में श्रद्धा, संगीत और भक्ति के यादगार संगम के रूप में संपन्न हुई।

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