तस्वीर में पर्युषण महापर्व के अवसर पर मंच पर बैठे मुनिगण और सामने खड़े हुए श्रावक-श्राविकाएं नजर आ रहे हैं।

पर्युषण महापर्व की आध्यात्मिक साधना के पश्चात आयोजित क्षमापना दिवस श्रद्धा, संवेदना और आत्मशुद्धि के भावों से भर गया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने वर्षभर में जाने-अनजाने हुए मन, वचन और कर्म के अपराधों के लिए एक-दूसरे से क्षमायाचना की और मैत्री व आत्मीयता का संदेश दिया।

इस अवसर पर मुनि कुलदीप कुमार ने क्षमा के विविध आयामों पर प्रकाश डालते हुए इसके गहरे आध्यात्मिक रहस्यों को सामने रखा। उन्होंने बताया कि क्षमा केवल किसी को ‘माफ कर देना’ भर नहीं है, बल्कि यह भीतर संचित क्रोध, मान, माया और द्वेष की गांठों को खोलने वाली आध्यात्मिक प्रक्रिया है। सच्ची क्षमा वही है, जिसमें सामने वाले के साथ-साथ स्वयं के अंतर्मन को भी मुक्त किया जाए।


 


मुनि कुलदीप कुमार के प्रेरणादायी वक्तव्य ने उपस्थित जनसमुदाय को आत्मावलोकन के लिए प्रेरित किया। इसके बाद सभा के सभी पदाधिकारियों ने उपस्थित जनसमुदाय के समक्ष हृदय की गहराइयों से क्षमायाचना करते हुए मंगलकामना व्यक्त की।

भावपूर्ण क्षमायाचना के दौरान माहौल भावुक हो गया। कई आंखें नम हो गईं और पूरा वातावरण आत्मीयता, करुणा एवं मैत्री के भाव से भर उठा। उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने क्षमा के इस भाव को आत्मशुद्धि और आपसी संबंधों की मधुरता से जोड़ा।

क्षमापना दिवस ने यह संदेश दिया कि क्षमा केवल एक दिन की परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को निर्मल और संबंधों को मधुर बनाने की सतत साधना है।

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