पर्युषण पर्व में ध्यान पर विशेष जोर, साध्वीवृंद ने कहा- बाहर रहें, भीतर जीएं
पर्युषण पर्व पर कालबादेवी में ध्यान और आत्मचिंतन पर प्रवचन हुआ। साध्वीवृंद ने संयम, मैत्री और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया।
तस्वीर में मंच पर बैठी हुई साध्वियां और उनके पास खड़े लोग दिख रहे हैं।
पर्युषण महापर्व के अवसर पर महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल, कालबादेवी में आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित हुआ। साध्वीवृंद के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में धर्म, आत्मचिंतन और संयम से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया। ध्यान को जीवन रूपांतरण, एकाग्रता और आत्मजागरण की दिशा में महत्वपूर्ण साधना बताया गया।
शासनश्री साध्वीश्री कंचनप्रभाजी ने कहा कि ध्यान जीवन रूपांतरण की उत्तम पद्धति है। कुछ व्यक्ति सहज, सरल और उपशांत कषाय वाले होते हैं, जो हर परिस्थिति में संतुलित रहते हैं। उनका ध्यान चेतना की पवित्रता को प्रकट करता है। वे लगभग भीतर की दुनिया में जीते हैं और बाहर की दुनिया का सारा व्यवहार निभाते हैं। ध्यान का अलौकिक आनंद लेकर संयम के साथ ऐसे लोग मंजिल तक पहुंच जाते हैं।
शासनश्री साध्वीश्री मंजुरेखाजी ने कहा कि ध्यान के द्वारा एकाग्रता प्राप्त होती है, जिससे व्यक्ति का व्यक्तित्व अपने-आप आभामंडलमय होता है। स्वस्थ पारिवारिक जीवनशैली में आनंदानुभूति होती है। ध्यान इंद्रियों पर नियंत्रण करने का सशक्त आधार है। प्रेक्षाध्यान के द्वारा अलौकिक शक्ति प्राप्त होती है। श्वास प्रेक्षा तथा दीर्घ श्वास प्रेक्षा के माध्यम से आवेगों और आवेशों को मिटाकर शांति तथा सौहार्द की ओर बढ़ा जा सकता है।
पर्युषण पर्व की आराधना के क्रम में संवत्सरी के मंगल प्रभात में प्रतिक्रमण कर चौरासी लाख जीवों को क्षमा प्रदान करने और मैत्री का संदेश देने की बात कही गई। सब जीवों के साथ मैत्री कर अपनी भूलों को भूलने तथा सभी को माफ करने का अवसर संवत्सरी पर्व है। जिंदगी की कड़वाहट को भूलकर हर जीव के अंतर जगत में जाकर स्वयं को स्वयं के दर्शन करने का यह पर्व है। भगवान पार्श्वनाथ के दस जन्मों की पूर्णता पर पूरे श्रावक समाज ने खुशी व्यक्त की।
शासनश्रीजी ने कहा कि भगवान महावीर ने ध्यान से ही केवलज्ञान प्राप्त किया। ध्यान जीवन का विज्ञान है और हर समस्या का समाधान है। इससे हमारे हार्मोन्स संतुलित हो जाते हैं। ध्यान की शक्ति बहुत विस्तृत है और पूरे विश्व में इसकी प्रासंगिकता बहुत है।
कार्यक्रम का मंगलाचरण तेरापंथ समाज, दादर द्वारा किया गया। इसके बाद उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने साध्वीवृंद के सान्निध्य में धर्माराधना एवं आध्यात्मिक चिंतन का लाभ लिया।
इस अवसर पर आचार्य महाप्रज्ञ विद्यानिधि फाउंडेशन, श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ महिला मंडल, अणुव्रत समिति दक्षिण मुंबई सहित सभी संस्थाओं के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। दक्षिण मुंबई के साथ-साथ दादर-परेल-एल्फिंस्टन तथा सायन-कोलीवाड़ा क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की।
कार्यक्रम ने उपस्थित जनसमुदाय को बाहरी गतिविधियों के बीच अपने भीतर झांकने, आत्मचिंतन करने और जीवन में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने की प्रेरणा दी। यह जानकारी मुंबई सभा के प्रचार मंत्री नितेश धाकड़ एवं तेयुप दक्षिण मुंबई के उपाध्यक्ष दर्शन डागलिया ने दी।