चेम्बूर में संवत्सरी महापर्व की भव्य आराधना, 200 श्रद्धालुओं ने स्वीकारा अष्टप्रहरी पौषध
चेम्बूर में साध्वी निर्वाणश्री के सान्निध्य में संवत्सरी महापर्व मनाया गया, 200 भाई-बहिनों ने अष्टप्रहरी पौषध स्वीकार किया।
तस्वीर में चेम्बूर में साध्वीवृंद के सानिध्य में संवत्सरी महापर्व का कार्यक्रम दिख रहा है।
। चेम्बूर में महातपस्वी आचार्य महाश्रमण की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्री के पावन सान्निध्य में भगवती संवत्सरी महापर्व आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। संवत्सरी आराधना का क्रम प्रातः 6.00 बजे शुरू हुआ। इस अवसर पर 200 भाई-बहिनों ने अष्टप्रहरी पौषध स्वीकार कर आराधना का श्रीगणेश किया।
प्रातः 7.00 बजे साध्वी लावण्यप्रभा ने मंगलाचरण में ‘चौबीस जिन स्तुति’ गीत प्रस्तुत किया। साध्वी मधुरप्रभा ने साताधर्मकथा से तेतलीयुत का आख्यान प्रस्तुत किया, जबकि साध्वी मुदितप्रभा ने उत्तराध्ययन सूत्र के चातुरंगीय अध्ययन के आधार पर चार दुर्लभ तत्वों की व्याख्या की। इसके बाद साध्वीवृंद ने समवेत स्वरों में गुरुदेव तुलसी रचित गीत ‘आयो जैन धर्म रो प्रमुख पर्व’ की प्रस्तुति दी।
विदुषी साध्वी निर्वाणश्री ने धाराप्रवाह प्रवचन में कहा कि संवत्सरी महापर्व आत्मशुद्धि का परम पर्व है। यह पर्व भीतर के कालुष्य को पखारने की प्रेरणा देता है। प्रतिक्रमण के माध्यम से पापों का प्रक्षालन कर आत्मा की उज्ज्वलता प्राप्त करना ही इसका लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर का जीवन क्षमा की पराकाष्ठा का निदर्शन है। उन्होंने क्षमा व समता से पूर्ण जीवन जीया और विश्व को भी यही संदेश दिया।
साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा ने अपने प्रेरक वक्तव्य में भगवान पार्श्वनाथ के जीवन के मार्मिक प्रसंगों का विवेचन करते हुए जप करने की विशेष प्रेरणा दी। उन्होंने अहिंसा की महत्ता प्रतिपादित करते हुए कहा कि अहिंसा केवल कायिक स्तर पर ही नहीं होती, बल्कि मन और वाणी से भी हिंसा हो सकती है। पूर्ण अहिंसा तभी घटित होगी, जब व्यक्ति मन, वाणी और कर्म से किसी का अहित चिंतन न करे, कटु भाषा न बोले और शारीरिक पीड़ा न दे। उन्होंने कहा कि पर्युषण का सार पूर्ण अहिंसक चेतना का जागरण है।
कार्यक्रम में साध्वीवृंद ने तेरापंथ की साध्वीप्रमुखाओं के जीवन की अनमोल विशेषताओं को रोचक परिसंवाद के माध्यम से प्रस्तुत किया। साध्वी लावण्यप्रभा एवं साध्वी कुंदनयशा ने जैन धर्म के प्रभावक आचार्यों के जीवन प्रसंगों का वर्णन किया। वहीं साध्वी मुदितप्रभा एवं सा. मधुरप्रभा ने तेरापंथ के आचार्यों की जीवन झांकी प्रस्तुत की।
संवत्सरी महापर्व पर तपस्या व पौषध की मानो झड़ी लग गई। ग्रैंड नालंदा बैंक्वेट का विशाल परिसर भी श्रद्धालुओं के बढ़ते प्रवाह के कारण बहुत कम पड़ गया। व्यवस्थाओं के सम्यक् संचालन में तेरापंथ सभा, युवक परिषद आदि ने अथक श्रम किया। इस प्रकार चेम्बूर में संवत्सरी महापर्व की आराधना आध्यात्मिक साधना, आत्मशुद्धि, क्षमा और अहिंसक चेतना के संदेश के साथ संपन्न हुई।