सीतामाता अभयारण्य में बटरफ्लाई वॉक: 55 प्रतिभागियों ने खोजीं तितलियों की प्रजातियां
एक्सप्लोरर्स ग्रुप और वन विभाग के संयुक्त आयोजन में विद्यार्थियों ने तितलियों के जीवन चक्र और दुर्लभ वनस्पतियों की पहचान के गुण सीखे।
तस्वीर में सीतामाता अभयारण्य के जंगल में खड़े और बैठे हुए प्रतिभागी नजर आ रहे हैं।
सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य के दंमदमा गेट क्षेत्र में बिग बटरफ्लाई मंथ के अवसर पर स्वैच्छिक संस्था एक्सप्लोरर्स (Explorers) ग्रुप की ओर से बटरफ्लाई वॉक एवं नेचर एक्सप्लोरेशन वॉक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में करीब 55 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें 30 से अधिक विद्यालयी छात्र-छात्राएं एवं बालक-बालिकाएं शामिल रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः वन विभाग के फॉरेस्टर धर्मराज धाकड़ ने की। उन्होंने प्रतिभागियों को सीतामाता अभयारण्य की जैव विविधता, वन संरक्षण तथा वन्यजीवों के महत्व की जानकारी दी। इसके बाद प्रतिभागियों ने दंदमा गेट क्षेत्र का सर्वेक्षण किया और प्रातः करीब 9 बजे पैदल ट्रेक शुरू किया।
ट्रेक के दौरान मार्ग में दिखाई देने वाली विभिन्न तितलियों, कीटों, पक्षियों, पेड़-पौधों एवं अन्य जीवों का अवलोकन किया गया। विद्यार्थियों को उनकी पहचान, पारिस्थितिक भूमिका और संरक्षण के महत्व की जानकारी दी गई। तितली विशेषज्ञ अरविंद प्रजापत, फ्लोरा-फौना जानकार सुनील कुमार तथा पक्षी एवं वन्यजीव फोटोग्राफर राकेश बिश्नोई ने प्रतिभागियों के साथ अपने अनुभव साझा किए और विभिन्न प्रजातियों की पहचान एवं व्यवहार की जानकारी दी।
इस दौरान कॉमन सेलर (Common Sailer), मोनार्क (Monarch), चॉकलेट पैंसी (Chocolate Pansy), पीकॉक पैंसी (Peacock Pansy), येलो पैंसी, कॉमन टाइगर, स्पॉट स्वोर्ड टेल, ज़ेबरा ब्लू, कॉमन लेपर्ड, कॉमन लाइम, प्लेन ग्रे हॉक मोथ तथा कॉमन ग्रास येलो (Common Grass Yellow), इंडियन पॉइनियर, कॉमन क्रो, ग्रे पैंसी, येलो ऑरेंज टेप, वाइट ओरेंग टिप, थ्री स्पॉट ग्रास येलो, लेमन पैन्सी, प्लेन ब्लू, ब्लू पैन्सी, स्ट्रिप्ड टाइगर, बोरोनेट, स्किपर तथा पेल्लुसिड हॉक मोथ सहित अनेक तितली प्रजातियों की पहचान की गई।
विद्यार्थियों ने तितलियों के जीवन चक्र के विभिन्न चरणों—अंडा, कैटरपिलर (इल्ली), प्यूपा (कोष) एवं पूर्ण विकसित तितली—का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और इनके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। इसके साथ ही सीता माता में पाए जाने वाले पेड़, बेल और झाड़ियों की जानकारी दी गई तथा पौधों की पहचान करने का तरीका भी साझा किया गया।
फ्लोरा-फौना के जानकार सुनील कुमार कुमार ने बताया कि सीता माता वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी में तितलियों की इन प्रजातियों का पाया जाना यहां की स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का इंडिकेटर है। उन्होंने यहां संरक्षण सेंटर और बटरफ्लाई पार्क बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि यहां हिमालय में पाई जाने वाली वनस्पतियां और आर्किड की प्रजातियां भी मिली हैं। विभाग सस्टैनेबल इकोटूरिज्म के प्रयासों को सख्ती से लागू करे तो यहां बड़े स्तर का टूरिस्ट हब बन सकता है और यहां की दुर्लभ वनस्पति एवं जीवों का संरक्षण सुनिश्चित हो सकता है।
कार्यक्रम में जीवनलाल धाकड़, जीवन प्रकाश धाकड़, व्याख्याता बलवीर मीणा, बनवारी बैरवा, सुरेन्द्र सिंह सहित अनेक प्रकृति प्रेमियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई तथा विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण के प्रति प्रेरित किया।
एक्सप्लोरर्स ग्रुप पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता के अध्ययन, जिम्मेदारीपूर्वक घूमने के लिए प्रेरित करने तथा प्रकृति के प्रति जन-जागरूकता के लिए कार्यरत एक स्वैच्छिक समूह है। समूह की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम को वन विभाग का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे प्रकृति संरक्षण का संदेश अपने विद्यालयों और समाज तक पहुंचाकर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने का प्रयास करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार के नेचर एक्सप्लोरेशन कार्यक्रम विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के साथ प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण की भावना को भी मजबूत करते हैं। बिग बटरफ्लाई मंथ के अंतर्गत आयोजित यह पहल जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक सार्थक प्रयास सिद्ध हुई।