तस्वीर में रोशनी और गुब्बारों से सजे हॉल में बैठे लोग भजन सुनते नजर आ रहे हैं।

बड़ी सादड़ी। निकुंभ कस्बे में गणेश दरवाजा स्थित ग्वालियर रियासत कालीन प्राचीन गणेश मंदिर पर गणेश चतुर्थी के अवसर पर ग्रामवासियों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद सांयकालीन महाआरती मुख्य पुजारी कोमल दास वैष्णव ने संपन्न कराई। गणेश चतुर्थी पर मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा।

पूरे मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी विद्युत रोशनी से सजाया गया। भगवान गणेश की प्रतिमा को सिंदूर पोशाक धारण कराई गई। महाआरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

रात्रि में निकुंभ चौराहा स्थित मंशा पूर्ण हनुमान मंदिर के संरक्षक पुजारी महाराज श्याम दास वैष्णव के मुख्य आतिथ्य में भजन संध्या आयोजित हुई। भजन प्रवाहक भगवती दास वैष्णव आसावरा, रामलाल कुमावत बिलोट, रामेश्वर लाल मेनारिया सरथला, भारत सिंह राठौड़, लालजी कुमावत, शिवम वैष्णव बिनोता, सवाई लाल मेनारिया सांगरिया, मांगीलाल दमामी जलोदा, गणपत लाल टांक, अमृत लक्षकार, रामेश्वर लाल दशोरा और भेरूलाल लोहार ने गणपति वंदना से भजन संध्या की शुरुआत की।

भजन प्रवाहकों ने ‘गजानंद आ जाना मेरे घर आ जाना’ जैसे भक्ति से ओत-प्रोत भजनों की प्रस्तुतियां देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। इस दौरान श्रद्धालु भक्ति के रंग में रंगे नजर आए।

अतिथियों का स्वागत श्री राम सत्संग सेवा परिषद के अध्यक्ष प्रेम सिंह सिसोदिया की उपस्थिति में बड़ा मंदिर अध्यक्ष बंशीलाल लोहार, बंशीलाल माली, भेरूलाल सुथार, गोपाल लाल लौहार, गोटू लाल लोहार, रोड़ी लाल सालवी और जगदीश लाल माली ने किया। कार्यक्रम के अंत में आभार मांगीलाल पुरोहित एवं हीरालाल प्रजापत ने जताया।

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