तस्वीर में बड़ी सादड़ी के भवन परिसर के बाहर कई पुरुष और महिलाएं उपस्थित हैं।

बड़ी सादड़ी। निकुंभ कस्बे के समता भवन में विगत डेढ़ माह से निरंतर चल रही प्रवचन श्रृंखला में शासन दीपक निश्चल मुनि मसा ने श्रावकों को आत्मा और धर्म के संबंध के साथ पर्युषण पर्व की सार्थकता का संदेश दिया। मुनिश्री ने कहा कि आत्मा ही धर्म है तथा धर्म ही आत्मा है। आत्मा का स्वभाव अग्नि में तप की तरह होता है। जिस प्रकार तप को अग्नि से अलग नहीं किया जा सकता, उसी प्रकार आत्मा को भी धर्म से अलग नहीं किया जा सकता।

मुनिश्री ने प्रवचन में बताया कि पृथ्वी लोक पर प्रत्येक जीव के स्वभाव में सुख चाहने की इच्छा होती है। सुख प्राप्त करने के लिए तप का अनुष्ठान अति आवश्यक है। मानव जीवन में इस अनुष्ठान को पर्युषण जैसे पर्व के माध्यम से आत्मसात किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि क्षमा पर्व के रूप में पर्युषण पर्व का बहुत अधिक महत्व है। प्रत्येक मानव द्वारा जीवन में अपनी कमजोरियों का पता लगाकर उन पर विजय प्राप्त करने की तैयारी का नाम ही पर्युषण पर्व है। जीवन में अपनी छोटी-छोटी भूलों और शब्दों की चोट से आहत करने पर सामने वाले व्यक्ति से अंतर्मन के साथ क्षमा की याचना करना ही पर्युषण पर्व की सार्थकता है।

मुनिश्री ने कहा कि मानव मन में मैत्री के भाव पैदा करना ही पर्युषण पर्व को मनाना है। क्षमा गुण के बिना मानव जीवन प्राणविहीन हो जाता है। इस अवसर पर मुनिश्री ने अपने गुरुओं से अविनय असाधना के लिए क्षमा प्रार्थना की तथा श्रावकों को भी इसके लिए प्रेरणा प्रदान की।

सनातन श्रावक प्रेम सिंह सिसोदिया ने भी क्षमा याचना पर्व के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। मंत्री सुरेश सहलोत ने आगामी कार्यक्रम की जानकारी दी। अध्यक्ष महावीर मेहता ने सभी श्रावकों के सहयोग के लिए आभार जताया।

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